उदय प्रताप सिंह, इंदौर । दूसरे बच्चों के लिए वे दिनभर मेहनत कर रहे हैं। एक-एक ईंट चुनकर शिक्षा का मंदिर बना रहे हैं लेकिन उनके खुद के बच्चे ही शिक्षा के उस द्वार के बाहर खड़े हैं। सोमवार को जब पूरे प्रदेश में प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा था तब उत्कृष्ट विद्यालय में इन बच्चों को प्रवेश दिया गया। अब दूसरे बच्चों के लिए शिक्षा का मंदिर गढ़ने वाले इन मजदूरों के बच्चे भी इसी स्कूल में पढ़ेंगे। शिक्षा विभाग में यह अपने आप में एक नई पहल है। उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर में हॉस्टल का निर्माण चल रहा है। काम की तलाश में सोनकच्छ से आधा दर्जन से ज्यादा मजदूर परिवार इंदौर आकर इस परिसर में बस गए हैं। जब तक काम चलेगा, ये परिवार यहीं रहेंगे। गांव से बाहर जाने के कारण इनके बच्चों का स्कूल छूट गया है। गर्मी की छुटि्टयों के बाद जब सोमवार को उत्कृष्ट विद्यालय खुला तो परिसर में छात्रों की चहलकदमी बढ़ी।
असेम्बली में कतारबद्ध खड़े बच्चों को बाहर खड़े मजदूरों के बच्चे निहार रहे थे। उन बच्चों के चेहरों पर उठते भाव और आंखों में उमड़ते सवाल से साफ था कि वे जानना चाहते थे कि ईंट-गारा से हटकर ये कौन सी जगह है, जहां आकर इतना खुश हुआ जा सकता है। उन्हें देखकर जब ‘नईदुनिया’ द्वारा यह सवाल उठाया गया कि प्रवेशोत्सव में ये बच्चे प्रवेश क्यों नहीं पा सकते हैं? स्कूल प्रबंधन ने तुरंत इस पर गौर किया। इसके बाद ‘स्कूल चले हम’ अभियान का हिस्सा बनाकर इन्हें स्कूल में प्रवेश देने को कहा गया। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग के आला अफसर व उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर स्कूल का प्रबंधन भी तैयार हुआ। अब ये बच्चे इस स्कूल में पढ़ पाएंगे।
अनीसा ने पांचवीं तो रवि ने आठवीं के बाद छोड़ दी पढ़ाई : राज्य शासन के ‘स्कूल चले हम’ अभियान के बावजूद दूसरे शहरों से इंदौर में मजदूरी के लिए आए कई बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। इंदौर में काम की तलाश में हर साल हजारों की संख्या में मजदूर अपने परिवारों के साथ में आते हैं। कई लोगों का तो एक ठौर ठिकाना नहीं होता, इस वजह से उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में भी नहीं पढ़ पाते हैं। ऐसी ही कहानी सोनकक्ष के मजदूर परिवारों के बच्चों की है। इनमें रवि भील सोनकक्ष में आठवीं तक तो पढ़ा लेकिन पिता के साथ मजदूरी करने के लिए इंदौर आया तो पढ़ाई छूट गई। इसी तरह अनीसा भी पांचवीं तक पढ़ी, लेकिन परिवार के साथ इंदौर आने से पिछले एक साल से स्कूल नहीं जा पा रही है। ऐसे ही करीब एक दर्जन बच्चे हैं जो स्कूल जा सकते हैं लेकिन अभी तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली थी।
पहले ही दिन कक्षा में पहुंचे मजदूरों के ये बच्चे
उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में यहां के छात्रों के लिए 100-100 सीट का बालक व बालिका छात्रावास तैयार हो रहा है। इसका निर्माण तीन माह पहले ही शुरू हुआ है। इस कार्य में सोनकच्छ के आधा दर्जन परिवारों के सदस्य मजदूरी में लगे हुए हैं। इस वजह से इनके बच्चे विद्यालय परिसर में अस्थायी झोपड़ों में रह रहे हैं। इस इमारत को तैयार होने में एक साल से ज्यादा समय लगेगा, ऐसे में मजदूरों के बच्चे सालभर तो यहां के सरकारी स्कूल में पढ़ सकेंगे। ‘नईदुनिया’ की पहल पर उत्कृष्ट विद्यालय की प्राचार्य विजया शर्मा व मिडिल स्कूल की प्रभारी निर्मला मींज इन बच्चों के पास पहुंचीं।
उन्होंने उनके नाम, उम्र व किस कक्षा तक पढ़े हैं, यह जानकारी नोट की। छुटि्टयों के बाद सोमवार को स्कूल खुले। पहले ही दिन इनमें से कई बच्चों को मिडिल स्कूल में ले जाकर बैठाया गया। चॉकलेट देकर व तालियां बजाकर स्कूल में इनका भी स्वागत किया गया। इनमें से कई छात्राएं जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुकी हैं और 10वीं पास करने की इच्छुक हैं, स्कूल प्रबंधन उन्हें ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा दिलाने व स्कूल के शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाने का इंतजाम करेगा।
बच्चों को दिलाएंगे प्रवेश
विद्यालय परिसर में बन रहे छात्रावास में काम करने वाले मजदूरों के एक दर्जन से ज्यादा बच्चों को हम हमारे स्कूल में प्रवेश दिलाएंगे और उनकी शिक्षा का इंतजाम कराएंगे। जो बच्चे नियमित प्रवेश नहीं ले सकते हैं, उन्हें ओपन स्कूल व प्राइवेट फॉर्म भराएंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि ये बच्चे भी स्कूल में पढ़ सकें।





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