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ऑनलाइन सीईटी को निरस्त करने की तैयारी, मेरिट से मिलेगा प्रवेश ! Indore News

CET DAVV 2019 : ऑनलाइन सीईटी को निरस्त करने की तैयारी, मेरिट से मिलेगा प्रवेश
इंदौर। प्रोग्रामिंग में गड़बड़ी से बिगड़ी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) को लेकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की काफी किरकिरी हो चुकी है। मंगलवार को विभागाध्यक्षों की बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला ले लिया है, इसमें ऑनलाइन सीईटी को निरस्त करने की तैयारी हो गई है। जीरो एडमिशन ईयर से बचने के लिए विश्वविद्यालय ने मेरिट आधार पर विद्यार्थियों को दाखिला देने पर जोर दिया है। वहीं परीक्षा करवाने वाली कंपनी को विश्वविद्यालय नोटिस थमाने जा रहा है। यहां तक कंपनी को ब्लैक लिस्ट तक किया जा सकता है। मामले में ज्यादातर विभागाध्यक्षों ने अपनी सहमति दे दी है। मंगलवार को प्रभारी रजिस्ट्रार अनिल शर्मा ने विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक खंडवा रोड स्थित ईएमआरसी में रखी गई, जहां सीईटी के मुद्दे पर विश्वविद्यालय ने विधिक राय ली। इसके बारे में भी विभागाध्यक्षों को जानकारी दी गई।
बैठक में कुछ विभागाध्यक्षों ने शेष ग्रुप की ऑनलाइन परीक्षा की सिफारिश की। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारियों और विभागाध्यक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि ऑनलाइन परीक्षा को लेकर कार्यपरिषद ने मंजूरी थी, लेकिन निर्णय को लेकर अधिसूचना जारी नहीं हुई है। साथ ही सुझाव आया कि विभागाध्यक्ष के पास अध्यादेश 14 के तहत अपने विभागों में दाखिले के अधिकार हैं। इस पर अधिकांश विभागाध्यक्ष सहमत हो गए और उन्होंने मेरिट आधार पर दाखिले की प्रस्ताव रखा है। इसे लेकर अब विश्वविद्यालय ने 23 जून को करवाई ऑनलाइन सीईटी को निरस्त करने का मन बना लिया है। प्रभारी रजिस्ट्रार अनिल शर्मा ने बताया, परीक्षा निरस्त कर मेरिट आधार पर विभागों में दाखिले की प्रक्रिया करेंगे। परीक्षा बिगड़ने व विवि की छवि धूमिल करने को लेकर कंपनी को नोटिस देंगे। साथ ही कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।

दुविधा में पड़े विद्यार्थी
विश्वविद्यालय के इस फैसले से उन विद्यार्थियों को झटका लगा है, जिन्होंने सीईटी देने के बाद विवि में पढ़ने की आस में 22 दिन तक रिजल्ट का इंतजार भी किया। अब ये विद्यार्थी दुविधा में हैं, क्योंकि उन्होंने दाखिले के लिए कहीं और आवेदन नहीं किया था। वहीं उच्च शिक्षा विभाग की ऑनलाइन काउंसलिंग के दूसरे चरण के रजिस्ट्रेशन भी खत्म होने वाले हैं। ऐसे में विद्यार्थी अब कोर्ट की शरण ले सकते हैं जिससे विश्वविद्यालय की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। वहीं इस निर्णय ने 17 हजार विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
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