
मीरजापुर। सोनभद्र जाने पर अड़ी प्रियंका वाड्रा अब भी चुनार किले में मौजूद हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वो पीड़ितों से बिना मिले नहीं लौटेंगी। इस बीच खबर है कि पीड़ित परिवार के लोग प्रयिंका से मिलने के लिए पहुंच गए हैं। इस दौरान खींचतान की स्थिति बनी है। प्रियंका का आरोप है कि जो लोग मिलने आए हैं उनमें से बाकि लोगों को गेट पर रोक दिया गया है और सिर्फ दो लोगों को आने दिया गया।
इसके बाद प्रियंका जबरदस्ती गेट की तरफ आगे बढ़ रही है ताकि पीड़ितों से मिल सके वहीं पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है। इस बीच हल्की धक्का-मुक्की हुई है और प्रियंका एक बार फिर से धरने पर बैठ गई है।
प्रियंका ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि 24 घंटे हो चुके हैं और मैं तब तक यहां से नहीं जाउंगी जब तक मुझे सोनभद्र हिंसा के पीड़ितों से मिलने नहीं दिया जाता। साथ ही प्रियंका गांधी ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें पीड़ितों के परिजन रोते नजर आ रहे हैं। उन्हें इसके साथ पूछा है कि क्या इनके आंसू पोछना अपराध है।
वहीं दूसरी तरफ प्रियंका के समर्थन में सोनभद्र नरसंहार में पीड़ितों से मिलने के लिए तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन सहित सुनील मंडल, अबीर रंजन बिस्वास और उमा सरेन भी वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया।
इससे पहले प्रियंका को मनाने के लिए आधी रात के बाद कमिश्नर मीरजापुर मंडल और वाराणसी मंडल पहुंचे, साथ मे एडीजी पुलिस मौजूद रहे लेकिन वार्ता बेनतीजा साबित हुई। शनिवार सुबह से ही कार्यकर्ताओं का आना शुरू हो गया।
प्रियंका वाड्रा ने रात को चुनार गेस्ट हाउस में बने सादा दाल, चावल और सब्जी का ही भोजन किया। जबकि अन्य कार्यकर्ताओं के लिए भोजन के पैकेट्स आए। भीषण गर्मी में बार-बार बिजली कटौती से परेशान प्रियंका गेस्ट हाउस के दूसरी ओर अकेले टहलती रहीं और उनकी रात मच्छरों के बीच गुजरी। उनके पीए संदीप ने बताया कि भोर में करीब साढ़े चार बजे प्रियंका सोने के लिए कमरे में गईं। उधर सैकड़ो कांग्रेसी बाहर जमे रहे।
शनिवार सुबह से कार्यकर्ताओं का आनाजाना जारी हो गया। कांग्रेस नेता पीएल पुनिया, पंखुड़ी पाठक जैसे नेता मौके पर हैं और आगे की रणनीति तय की जा रही है।
इससे पहले शुक्रवार रात को प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि वो जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर राज्य सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने लिखा, ‘मैंने न कोई कानून तोड़ा है न कोई अपराध किया है। बल्कि सुबह से मैंने स्पष्ट किया था कि प्रशासन चाहे तो मैं अकेली उनके साथ पीड़ित परिवारों से मिलने आदिवासियों के गांव जाने को तैयार हूं या प्रशासन जिस तरीके से भी मुझे उनसे मिलाना चाहता है मैं तैयार हूं।’
अपने अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘मगर इसके बावजूद उप्र सरकार ने यह तमाशा किया हुआ है। जनता सब देख रही है। मैं इस संदर्भ में जमानत को अनैतिक मानती हूं और इसे देने को तैयार नहीं हूं। मेरी साफ मांग है कि मुझे पीड़ित आदिवासियों से मिलने दिया जाय। सरकार को जो उचित लगे वह करे। अगर सरकार पीड़ितों से मिलने के अपराध के लिए मुझे जेल में डालना चाहें तो मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।’
यह है सोनभद्र की घटना
बुधवार को सोनभद्र के घोरावल थाना क्षेत्र के गांव उभ्भा में जमीन कब्जा करने गए प्रधान सहित 300 लोगों ने वहां काबिज ग्रामीणों पर हमला कर दिया था, जिसमें दस की मौत हो गई थी, जबकि 28 घायल हुए थे। इसी हिंसा के पीड़ितों से मिलने के लिए प्रियंका शुक्रवार को वाराणसी पहुंची और अस्पताल में घायलों से मिलने के बाद सोनभद्र रवाना हुई लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक लिया गया।





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