
रायपुर। विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों के लिए अब खेती-बाड़ी की पढ़ाई आसान होगी। उन्हें घर के निकट कॉलेज में सीट सहित स्थानांतरण (ट्रांसफर) की छूट मिलेगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि उद्यानिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी कॉलेजों में यह सुविधा मिलेगी।
इंदिरा गांधी कृषि विवि प्रबंधन छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों (अबूझमाड़िया, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं बैगा) के छात्र-छात्राओं को अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्नातक पाठ्यक्रम में उनके मूल निवास के समीप संचालित कॉलेजों में प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराएंगा।
कृषि विवि के अधिकारियों ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2019-20 में किसी भी महाविद्यालय में प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों को उनकी मांग के आधार पर उनके मूल निवास स्थान के आसपास स्थित कॉलेज में नियमानुसार सीट सहित स्थानांतरित किया जाएगा।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों को उनके मूल निवास के आसपास संचालित कॉलेजों में प्रवेश देने के लिए विभिन्न् जनजातियों के लिए विभिन्न् कॉलेजों में सीटों का आरक्षण किया गया है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 में प्रवेश लेने वाले अबूझमाड़िया जनजाति के विद्यार्थियों के लिए कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र नारायणपुर, जगदलपुर तथा उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध होगी।
इन कॉलेजों में होगी स्थानांतरण की सुविधा
बैगा जनजाति के विद्यार्थियों के लिए कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरिया, कवर्धा तथा उद्यानिकी महाविद्यालय, राजनांदगांव एवं कृषि अभियांत्रिकी कॉलेज मुंगेली में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध होगी।
पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर जनजाति के विद्यार्थियों के लिए कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर, कोरबा एवं जशपुर में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध होगी । कमार जनजाति के विद्यार्थियों के लिए कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र, गरियाबंद, धमतरी और महासमुंद में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध होगी।
विश्वविद्यालय प्रबंध मंडल की 84वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों को कृषि शिक्षा में अवसर प्रदान करने के लिए कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सभी कृषि, उद्यानिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में दो-दो सीटों का प्रावधान शैक्षणिक सत्र वर्ष 2012-13 से किया गया है।
इस निर्णय के अनुसार विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों को नियमानुसार सभी कॉलेजों की आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिया जाता था। यह कॉलेज उनके मूल निवास स्थान के समीपस्थ होना आवश्यक नहीं था। नए शैक्षणिक सत्र से विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों को काउंसिलिंग के दौरान जिस किसी भी कॉलेज में दाखिला मिला हो, उनका स्थानांतरण सीट सहित उनके मूल निवास के निकटस्थ कॉलेज में कर दिया जाएगा।





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