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लापरवाही / तड़पता रहा डायल-100 का पायलट, कोरोना के डर से डॉक्टरों ने इलाज तो दूर देखा तक नहीं | Bhopal News

याेगेंद्र ने 29 अप्रैल काे हमीदिया में डायलिसिस कराई थी।
4 परिजन ने कोरोना को हराया, पायलट की रिपोर्ट निगेटिव फिर भी डॉक्टर नहीं माने
डाॅक्टराें पर याेगेंद्र का काेराेना संदिग्ध मरीज हाेने की आशंका के चलते इलाज नहीं करने का आराेप लगाया
भोपाल। जहांगीराबाद थाने की डायल 100 के पायलट याेगेंद्र साेनी (35) की हमीदिया अस्पताल में दाे दिन पहले इलाज के दाैरान माैत हाे गई। परिजन ने हमीदिया और निजी अस्पताल के डाॅक्टराें पर याेगेंद्र का काेराेना संदिग्ध मरीज हाेने की आशंका के चलते इलाज नहीं करने का आराेप लगाया है। उन्होने कहा कि हमीदिया में याेगेंद्र तड़पते रहे, लेकिन जूनियर डाॅक्टर इलाज करने के बजाय दूर खड़े देखते रहे। साउथ टीटी नगर निवासी याेगेंद्र का 3 साल से मालवीय नगर स्थित निजी अस्पताल में डायलिसिस चल रहा था। वे डाॅ. हुनेद से डायलिसिस कराते थे। 18 अप्रैल काे उन्होंने डायलिसिस करने से इनकार कर दिया और कहा कि आप अपनी व्यवस्था कहीं और करा लीजिए। इस संबंध में डाॅ. हुनेद से बात करनी चाही, लेकिन उन्हाेंने मोबाइल फोन रिसीव नहीं किया।
डायलिसिस के बाद बिगड़ी सेहत
परिजन ने बताय कि याेगेंद्र ने 29 अप्रैल काे हमीदिया में डायलिसिस कराई थी। रात में उनकी तबीयत बिगड़ गई तो उन्हें लेकर जेपी अस्पताल पहुंचे। यहां से हमीदिया रैफर कर दिया। परिजन का आराेप है कि हमीदिया में डाॅक्टराें ने मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया। वे दर्द से तड़प रहे थे, लेकिन काेई डाॅक्टर पास जाने काे तैयार नहीं था।
डॉक्टरों की लापरवाही से गई मेरी बेटी की जान
विमला साेनी, मृतक याेगेंद्र की मां के मुताबिक,डाॅक्टराें की लापरवाही से मेरे बेटे की जान गई है। डाॅक्टर समय पर इलाज शुरू कर देते ताे अाज मेरा बेटा जिंदा हाेता, लेकिन डाॅक्टराें ने काेराेना के डर से इलाज ही नहीं किया।
मैं गिड़गिड़ाती रही, पर डॉक्टरों ने एक नहीं सुनी 
रेखा, योगेंद्र की पत्नी​​​​​​​ के मुताबिक, मैंने डाॅक्टराें के हाथ जाेड़े कि मेरे पति को देख लो, वे काेराेना के मरीज नहीं हैं। मैंने रिपाेर्ट भी दिखाई, लेकिन डाॅक्टराें ने मेरे साथ गाली-गलौज की। गार्ड से कहकर मुझे वार्ड से बाहर करा दिया।
भावनाओं में बहकर परिजन ने आरोप लगाए
डाॅ. एके श्रीवास्तव, डीन, जीएमसी के मुताबिक, मरीज गंभीर स्थिति में हमारे पास अाया था। उसे जाे इलाज दिया सकता था, डॉक्टरों ने वह दिया। परिजन ने भावनाअाें में बहकर अाराेप लगाए हैं। हमने जूनियर डाॅक्टर समेत विभाग के अन्य स्टाफ से भी पूछताछ की है।
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