करैरा। शिवपुरी जिले के करैरा स्थित प्रसिद्ध बगीचा सरकार मंदिर में हुए विवाद का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। संत समाज द्वारा प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद मंगलवार को पिछोर विधायक प्रीतम लोधी समर्थकों और काफिले के साथ बगीचा सरकार मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने संत समाज के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
श्री बगीचा सरकार सनातन रक्षा एवं श्रद्धालु जनकल्याण समिति के बैनर तले संत समाज और श्रद्धालुओं ने अनुविभागीय दंडाधिकारी करैरा को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मंदिर परिसर को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराने, निष्पक्ष जांच कराने और संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
संत समाज ने आरोप लगाया कि 9 मई 2026 की रात मंदिर परिसर में मुख्य महंत राजेन्द्र गिरी महाराज के साथ मारपीट और जानलेवा हमले का प्रयास किया गया। इस मामले में भोला पंडित, शासकीय शिक्षक सुधीर दुबे एवं उनके सहयोगियों पर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि घटना के दौरान यादव, गुर्जर और पाल समाज के लोगों ने संत समाज का सहयोग किया, अन्यथा बड़ी अप्रिय घटना हो सकती थी। संत समाज ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
संत समाज ने करैरा पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके आवेदन पर अब तक अपराध दर्ज नहीं किया गया है। साथ ही मंदिर की आय और चढ़ावे की राशि का पिछले वर्षों का वित्तीय ऑडिट कराने और प्रशासनिक निगरानी में जांच कराने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन में भोला पंडित और उनके परिवार की संपत्तियों, बैंक खातों, भूमि क्रय-विक्रय और आय के स्रोतों की आर्थिक जांच कराने की मांग की गई है। आरोप लगाया गया है कि मंदिर की धार्मिक आय का निजी उपयोग कर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति अर्जित की गई है।
इस बीच मंदिर पहुंचे विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि संत समाज के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। विधायक ने कहा कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। विधायक ने कहा की अगर संतो पर बात आएगी तो हम मैदान में उतरेंगे।
ज्ञापन में मंदिर की व्यवस्था को शासकीय ट्रस्ट अथवा धार्मिक न्यास व्यवस्था के अंतर्गत लाने, मंदिर परिसर में स्थायी सुरक्षा गार्ड एवं पुलिस व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा मंदिर को राजनीतिक, आपराधिक और भू-माफिया गतिविधियों से मुक्त कराने की मांग भी शामिल है।
मंदिर विवाद को लेकर क्षेत्र में लगातार तनाव और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।








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