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राजस्व महकमें में 15-15 वर्षों से जमे हुए हैं बाबू,नहीं हो रहा स्थातंरणनिति का पालन

कोलारस राजस्व महकमें के बेबाक आरोपित कडवे सच पर

कोलारस राजस्व महकमें में बाबूराज कायम?

कोलारस।साल बदला,तारीख बदली,अधिकारियों से लेकर तमाम जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन कोलारस राजस्व महकमें की सूरत नहीं बदली। कोलारस राजस्व महकमें में एक पर एक भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके है, भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने की वजह जिम्मेदार हमेशा कमाउ अधिनष्तों को बचाने की कवायद में देखे गए हैं, जनता के लोग सवाल कर रहे हैं की राजस्व महकमें में हुए भ्रष्टाचार के मामलों का खुलाशा होने के बावजूद सरकारी तंत्र में मंत्र बने हुए भ्रष्टाचारियों को निकाल बाहर फेंका क्यों नहीं जा रहा है।

जमकर वसूला जा रहा है सुविधा शुल्क
कोलारस का राजस्व विभाग मध्यप्रदेश राज्य शासन का एक ऐसा विभाग है जिसमें जितना गहरा उतरा जाए उतने ही हैरत में डालने वाले भ्रष्टाचार के मामले
सामने आते रहेगें। राजस्व विभाग में कायम बाबूराज की प्रथा के कारण यहां राजस्व से संबंधित कोई काम बिना सुविधा शुल्क अदा किए नहीं होता।

राजस्व महकमें में हावी हुई दलाली प्रथा
कोलारस राजस्व महकमें में दलाली प्रथा इतनी हाबी हो चुकी है की बिना सुविधा शुल्क अदा किए बगैर यहां अब कोई काम नहीं होता और महज एक जाति
प्रमाण पत्र बनाने के बदले में तक तथाकथित बाबओं द्वारा पांच सौ से हजार रूपये तक सुविधा शुल्क लिया जा रहा है।

राजस्व महकमें में जाति प्रमाण पत्र बनबाने, कंट्रोल दुकान कि शिकायतें, ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार की शिकायते, भ्रष्ट पटवारियों की शिकायतें, खनिज
विभाग से संबधित कार्य, क्रषि भूमियों के डायवर्सन आदि हर काम का अलग-अलग सुविधा शुल्क वसूला जाता है। अगर आप अपना कार्य जल्दी चाहते हैं तो वहां बैठे बाबूओं को उनकी मनचाही राशि मुहैया कराकर आप अपना कार्य शीघ्रता से करा सकते है। नही तो एक छोटे से कार्य के लिए भी आपको महीनों राजस्व महकमें में भटकना पड सकता हैं। हर कार्य में लेन देने होने से किसानों एवं पक्षकारों का तो यहां तक कहना है कि राजस्व
विभाग में हर कार्य की एक फिक्स-रेट लिस्ट टांग दी जाए तो वो बेहतर होगा, क्योंकि ग्रामीण संबंधित बाबूओं को दान-दक्षिणा देकर अपना काम करा सके।

नहीं हो रहा स्थानांतरण नीति का पालन
कोलारस राजस्व विभाग में पदस्थ बाबू निरंतर 15 साल से जमे हुए हैं। जबकि इनके पहले कई आए और कुछ ही महीनों में स्थानांतरित होकर चले गए। अंगद के पैर की तरह जमे इन बाबूओं को भ्रष्टाचार का रोग लग जाने से वह राजस्व महकमें में ही संबधितों से उनके कार्यो के एवज में जमकर सुविधा शुल्क बटोरने में लगे हुए हैं। ग्रामीणों को विवश होकर उन्हें उनके द्वारा मांगी गई मुंह मांगी रक्म अदा कर अपने कार्य निपटवाने पड रहे हैं।

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