डॉ. एनएस राजपूत और रीता गुप्ता फरियादी अंजुम बेगम को उक्त रकम करें जमा : उपभोक्ता फोरम
शिवपुरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में झांसी उत्तरप्रदेश के डॉॅ. एनएस राजपूत स्त्री रोग विशेषज्ञ और विद्या देवी अस्पताल शिवपुरी की डॉ. रीता गुप्ता को आवेदिका अंजुम बेगम का लापरवाहीपूर्ण तरीके से ऑपरेशन करने का दोषी मानते हुए आदेशित किया है कि दोनों डॉक्टर संयुक्त या पृथक-पृथक रूप से आवेदिका को एक माह के अंदर उसके अभी तक हुए ऑपरेशन एवं इलाज खर्च के रूपए 4 लाख 71 हजार रूपए अदा करें। इसके साथ ही इसी संबंध में कराए जाने वाले आगामी ऑपरेशन के लिए भी दोनों डॉक्टरों को 3 लाख 50 हजार रूपए पृथक रूप से अदा करने होंगे। इस तरह से उन्हें आवेदिका के ऑपरेशन एवं इलाज खर्च हेतु 8 लाख 21 हजार रूपए अदा करने होंंगे। इस दौरान आवेदिका को जो मानसिक पीड़ा हुई है उसके लिए भी उन्हें 5 लाख रूपए 1 माह के भीतर भुगतान करना होंगे। यदि उक्त कुल राशि 13 लाख 23 हजार रूपए एक माह के भीतर अदा न हुए तो निर्णय दिनांक से एक माह पश्चात उक्त राशि पर अनावेदकगण डॉक्टर आवेदिका को अदायगी दिनांक तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज भी अदा करे। उक्त निर्णय उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष गौरी शंकर दुबे और सदस्य राजीव कृष्ण शर्मा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुनाया। इस मामले में आवेदिका अंजुम बेगम की ओर से एडवोकेट विजय तिवारी ने पैरवी की।
शिकायतकर्ता अंजुम बेगम ने उपभोक्ता फोरम को बताया कि उसके योनि मार्ग में रक्त स्त्राव होता था। इस पर उसने न्यू ब्लॉक में विद्या देवी हॉस्पिटल में दिखाया। जहां महिला डॉ. रीता गुप्ता ने बच्चादानी निकलवाने की सलाह दी और बताया कि आवेदिका का ऑपरेशन सर्जन डॉ. एनएस राजपूत द्वारा किया जाएगा। अस्पताल में 9 नबंवर 2014 को डॉ. राजपूत द्वारा उसका ऑपरेशन किया गया। आवेदिका का कहना है कि उससे ऑपरेशन का शुल्क 18 हजार रूपए लिया गया। जिसकी रसीद नहीं दी गई। ऑपरेशन के दो दिन बाद ही आवेदिका का पेट फूलना शुरू हो गया और उसे असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा। तब उसने कल्पाना एक्सरे से डॉ. रीता गुप्ता के कहने पर सोनोग्राफी कराई और उसे ग्वालियर में डॉ. अंशुमन सोमानी को रैफर कर दिया गया। आवेदिका के मेडीकल टेस्ट कराए और उसकी बड़ी आंत में छेद पाए गए। पूरे पेट में मवाद के कारण संक्रमण हो गया। फेफड़ों की बाहरी झिल्ली में द्रव पद्रार्थ भर गया। डॉ. सोमानी ने उसे सराफा अस्पताल में सर्जन को रैफर कर दिया। डॉ. सर्राफ ने उसके पेट के बाए हिस्से में कुत्रिम मलद्वार बनाया और उसका ऑपरेशन बैजाईनल हिस्ट्रेक्टॉमी का ऑपरेशन किया गया। परंतु आवेदिका को कोई लाभ नहीं हुआ। उसकी गंभीर स्थिति देखकर उसे दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में रैफर कर दिया गया। जहां 15 मई 2015 को उसकी सर्जरी हुई और वह वहां एक सप्ताह तक भर्ती रही। आवेदिका से ऑपरेशन का खर्च 1 लाख 92 हजार 306 रूपए लिया गया। अभी भी आवेदिका बिस्तर पर है और उसकी पेशाब की जगह से मल निकलता है तथा वह दैनिक कार्य करने चलने फिरने में असमर्थ है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों डॉक्टरों को 13 लाख 23 हजार रूपए आवेदिका को भुगतान करने का आदेश दिया गया।





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