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बरसात की आहट से क्षतिग्रस्त हुआ इंदार का 1 करोड़ 39 लाख का पुल, सत्ता व विपक्ष में खामोशी

जन आशीर्वाद और किसान यात्रा की जगह हो गंभीर भ्रष्टाचार पर फोकस
ठेकेदार सहित विभागीय अधिकारियों पर हो दंडात्मक कर्यवाही
दिशा बदले तो दशा बदले- विवेक व्यास 
कोलारस। इंदार नदी पर विगत वर्ष बना पुल बरसात की एक छोटी सी मार से क्षतिग्रस्त हो गया। विगत 3 वर्ष से अल्पवर्षा के चलते ठेकेदारों ने पुल पुलिया इस हेतु कमजोर और गुणवत्ता हीन बनाना शुरू कर दिए कि अब कोलारस क्षेत्र में वर्षा होती ही नही है । 
भाजपा शासन काल मे कुछ भी हो सकता है अब जनता यह कहने लगी है। सड़कों के कार्य में घटिया काम तो होता रहा है । बही अब प्रधानमंत्री सड़क योजना में तो ठेकदार और अधिकारियों का गठजोड़ भ्रस्टाचार की सभी हदे पार करने को है।देखने वाला कोई नही।
इंदार का उक्त पुल कई गांवों को जोडऩे का काम करता है इसकी मांग काफी समय से चल रही थी।निर्माण के समय भी ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता को लेकर आवाज़ उठाइ थी। किन्तु भाजपा सहित विपक्षी कांग्रेस भी मूक रही। ये समय भाजपा को किसान यात्रा और जन आशीर्वाद यात्रा निकालने का नही है। इन यात्राओं से कुछ होने वाला नही है विगत 14 साल से भाजपा की यात्राओं से जनता वोर हो चुकी है। जिसका खामियाजा हाल ही मर सम्पन हुए 4 उपचुनाव में भाजपा ने भुगत लिया। इस भ्रष्टाचार के कारण ही भाजपा को सत्ता होते हुए और पानी की तरह पैसा बहाने के वाद भी हार मिली। इस हार पर शायद सही से चिंतन नही हुआ।अब ये बताने की आवश्यकता है कि जहाँ घपले हो रहे है उन्हें बक्शा नही जाना चाईए। पुल जौसे बुनियादी काम मे गुणवत्तापूर्ण न होना कभी भी जनता की जान माल को खतरे का सबब बन सकता है। इस लेख को पढ़कर भी ठेकेदार और अधिकारियों के मुंह से जाम टकराते यही निकलेगा की ये सब तो चलता रहता है शायद उन पर कोई कार्यवाही भी नही होगी क्योंकि में ऐसी कम्पनी में समय गुजार चुका हूँ। किन्तु उन्हें ये पता नही है कि ये भाजपा की जड़ों में मठ डालने का कॉम है। हर 6 माह में शिवपुरी और कोलारस में अधिकारी अमला बदल रहा है। बात ये है कि पल अभी से नाजूक हालात में पहुच गया है यदि हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी है।

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