मिल गए Walkie Talkie, किस तरह होता है उपयोग, नहीं है इसका पता ! Jabalpur News

मिल गए  Walkie Talkie, किस तरह होता है उपयोग, नहीं है इसका पता
जबलपुर। नगर निगम ने करीब 35 लाख रुपए खर्च कर फील्ड में रहने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के हाथों में वाकी-टाकी (वायरलेस सेट) तो पकड़ा दिए, लेकिन डेढ़ साल बाद भी अधिकारी-कर्मचारी इसे उपयोग करने का तरीका नहीं सीख पाए। अधिकांश को यह तक पता नहीं कि यह चलता कैसे है। संभागीय अधिकारियों ने जहां वाकी-टाकी रखना ही छोड़ दिया तो कुछ विभागों के कर्मचारी सिर्फ दिखावे के लिए अपने पास रखे हुए हैं।
हालांकि नगर निगम ने अब इसकी सुध लेते हुए इसके इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार को नगर निगम में संभागीय अधिकारी और विभागीय प्रभारियों की बैठक ली गई। इसमें पुलिस के रेडियो शाखा इंस्पेक्टर अमित जैन ने वाकी-टाकी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया।

चैनल मिलाना तक नहीं जानते
प्रशिक्षण में यह बात भी सामने आई कि निगम के संभागीय अधिकारी, अतिक्रमण शाखा सहित अन्य विभागों के अधिकारी और मैदानी अमले को वाकी-टाकी तो दे दिया गया, लेकिन इनमें से अधिकांश को चैनल मिलाना तक नहीं आता। संभागीय अधिकारियों ने फ्रिक्वेंसी और नेटवर्क न पकड़ने की भी बात कही। जिस पर उन्हें चैनल मिलाने और ऊंचाई पर होने पर रिसीवर के एंटीना की ऊंचाई बढ़ाने के टिप्स बताए।

सेट बदलने पर दिया जोर
– वाकी-टाकी को लेकर अधिकारी कर्मचारियों ने यह भी पूछा कि पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क काम नहीं करता। फ्रिक्वेंसी भी ठीक से काम नहीं करता। कुछ ने कहा कि यह काम ही नहीं करता। इस पर रेडियो इंस्पेक्टर ने सेट बदलने पर जोर दिया।

फैक्ट फाइल
– 35 लाख रुपए वाकी-टाकी खरीदने में किए थे खर्च।

– 500 सेट खरीदे गए थे।
– तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर वेदप्रकाश के कार्यकाल में हुई थी खरीदी।

-15 संभागीय अधिकारियों के अलावा अतिक्रमण, स्वास्थ्य व मैदानी अमले को दिए गए हैं।