नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के तहत फैक्ट चेक यूनिट बनाने को लेकर केंद्र की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है।इस फैक्ट चेक यूनिट को केंद्र सरकार के बारे में फर्जी खबरों की पहचान करने और उसे रोकने के लिए बनाया गया था।
CJI चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 11 मार्च के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें फैक्ट चेकिंग यूनिट बनाने पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (Meity) ने 20 मार्च को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत फैक्ट चेक यूनिट को अधिसूचित किया था। 2023 अप्रैल में सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन किए गए थे।
नए नियमों के तहत अगर फैक्ट चेक यूनिट को ऐसे किसी भी पोस्ट के बारे में पता चलता है, जो फर्जी या गलत है या जिसमें सरकार के कामकाज को लेकर भ्रामक तथ्य हैं, तो वह इसे सोशल मीडिया मध्यस्थों के पास भेज देगा। इसके बाद ऑनलाइन मध्यस्थों को ऐसे कंटेंट हटाने होंगे।

PIB की फैक्ट चेक यूनिट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भ्रामक दावों को लेकर अक्सर पोस्ट करती रहती है।
याचिकाकर्ताओं ने नियमों को असंवैधानिक बताया
याचिकाकर्ताओं में शामिल स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स और अन्य ने फैक्ट चेक यूनिट के नियमों को मनमाना, असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में 3 दलीलें रखीं
- सबके के लिए एक स्वतंत्र फैक्ट चेक यूनिट रहनी चाहिए, जबकि केंद्र सरकार इसे सिर्फ अपने लिए ला रही है, जो मनमाना है।
- क्या गलत है या क्या नहीं, यह तय करने के लिए फैक्ट चेक यूनिट केंद्र के फैसले पर निर्भर नहीं हो सकता।
- चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में फैक्ट चेक यूनिट केंद्र के लिए एक हथियार बन जाएगा, जिससे वे तय करेंगे कि मतदाताओं को कौन सी जानकारी दी जाए।











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