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कौन-कितना पावरफुल मंत्री है MP में: बजट के एक तिहाई हिस्से वाले विभाग 5 दिग्गजों को; प्रहलाद पटेल को सबसे बड़े बजट वाला विभाग

मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार ने कैबिनेट विस्तार के पांचवें दिन मंत्रियों को विभाग बांटे। सरकार के टॉप-5 चेहरों को बड़े बजट वाले विभाग मिले हैं। सरकार का कुल बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ रुपए के लगभग है। इन पांच मंत्रियों को जो विभाग सौंपे गए हैं, उनका कुल बजट करीब 1 लाख करोड़ रुपए का है।

सबसे ज्यादा 28 हजार करोड़ रुपए के बजट वाले पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी प्रहलाद पटेल को सौंपी गई है। वहीं, 13 हजार करोड़ रुपए के बजट वाले नगरीय प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय को दी गई है। इंदौर के मेयर रहे कैलाश को 20 साल बाद फिर यह विभाग मिला है।

राव उदय प्रताप सिंह दूसरे सबसे अधिक बजट वाले स्कूल शिक्षा विभाग को संभालेंगे। इस विभाग का बजट करीब 27 हजार करोड़ रुपए है।

मोहन सरकार ने मंत्रियों के विभाग बंटवारे में पावर बैलेंस बनाने की कोशिश की है। दोनों डिप्टी सीएम में से जगदीश देवड़ा को उनके पुराने विभाग सौंपकर भरोसा जताया गया है कि सरकार का वित्तीय लेखा-जोखा अनुभवी हाथों में रहे। दूसरे डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा है। दोनों का बजट ढाई हजार करोड़ रुपए से अधिक है।

बीती 25 दिसंबर को मोहन सरकार के इन मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की थी।

बीती 25 दिसंबर को मोहन सरकार के इन मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की थी।

अब जानिए विभाग के बजट के हिसाब से कौन मंत्री कितना पावरफुल

राजेंद्र शुक्ल : इलाज से लेकर मेडिकल एजुकेशन संभालेंगे

पावरफुल क्यों : डिप्टी सीएम हैं। किसी भी राज्य में कानून-व्यवस्था के बाद हेल्थ एक बड़ा मुद्दा होता है। इसकी कमान अनुभवी राजेंद्र शुक्ल को सौंपी गई है। पिछली सरकार में चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी विश्वास सारंग और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी डॉ. प्रभुराम चौधरी के पास थी।

जगदीश देवड़ा : भाजपा के संकल्प पत्र को जमीन पर उतारने की चुनौती

पावरफुल क्यों : दूसरे डिप्टी सीएम हैं। अर्थशास्त्र से एमए किया है मतलब अर्थ की समझ सभी मंत्रियों में सबसे बेहतर है। पिछली बार भी बजट की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। सरकार को अपने संकल्प पत्र की योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए देवड़ा से बेहतर वित्त मंत्री कोई और नहीं मिल सकता था।

कैलाश विजयवर्गीय : शहरों का चेहरा सुधारने की जिम्मेदारी, इंदौर को संवार चुके हैं

पावरफुल क्यों : पिछली बार के बजट में 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट नगरीय प्रशासन विभाग का रहा है। पहले भी विजयवर्गीय ये विभाग संभाल चुके हैं। महापौर भी रह चुके हैं। शहरों की बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी उनके पास होगी। इसके अलावा उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। विधानसभा का फ्लोर मैनेजमेंट उन्हीं के पास रहेगा।

प्रहलाद सिंह पटेल : गांवों के विकास की जिम्मेदारी, जमीन से जुड़े नेता

पावरफुल क्यों : केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। सीएम पद के दावेदार माने जा रहे थे। पिछली बार पंचायत एवं ग्रामीण विकास का बजट 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक रहा था। गांवों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पटेल को जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है।

राकेश सिंह : प्रदेश के विकास की छवि को बनाने का जिम्मा

पावरफुल क्यों : चार बार के सांसद राकेश सिंह पहली बार विधायक एवं मंत्री बने हैं। पिछली बार ये विभाग गोपाल भार्गव के पास था। प्रदेश में विकास की तस्वीर वहां की सड़कें बयां करती हैं। पिछली बार पीडब्ल्यूडी विभाग का बजट 7500 करोड़ रुपए से अधिक था।

उदयप्रताप सिंह : संघ की पसंद से दिया गया विभाग

पावरफुल क्यों : दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। तीन बार के सांसद रह चुके हैं। पहली बार मंत्री बने हैं। स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 27 हजार करोड़ से अधिक है। पिछली बार परिवहन विभाग गोविंद सिंह राजपूत के पास था। हाल ही में प्रदेश में सड़क हादसों के बाद कमान अनुभवी हाथों में सौंपी गई है।

संपतिया उइके : आदिवासी इलाकों में पेयजल संकट दूर करने की जिम्मेदारी

पावरफुल क्यों : पहली बार विधायक एवं मंत्री बनी हैं। तीन बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। महिला होने के साथ ही महाकौशल अंचल में बड़ा आदिवासी चेहरा मानी जाती हैं। पिछली बार 8500 करोड़ रुपए से अधिक का बजट पीएचई का था। आदिवासी इलाकों में पेयजल सबसे बड़ा संकट है। संपतिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने की जवाबदारी सौंपी गई है।

करण सिंह वर्मा : पहले भी संभाल चुके हैं विभाग

पावरफुल क्यों : पूर्व में करण सिंह वर्मा राजस्व विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 8 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट वाला विभाग है। अनुभव को देखते हुए एक बार फिर इस विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुंवर विजय शाह : पहले भी रह चुके जनजातीय मंत्री

पावरफुल क्यों : विजय शाह पहले भी जनजातीय विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पिछली सरकार में वन मंत्री थे। लोक परिसंपत्ति एवं प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी पहली बार मिली है। पिछली बार जनजातीय विभाग की जिम्मेदारी मीना सिंह ने संभाली थी। लोक परिसंपत्ति एवं प्रबंधन विभाग तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के पास था।

तुलसीराम सिलावट : जल संसाधन में बेहतर परफॉर्मेंस

पावरफुल क्यों : तुलसीराम सिलावट पिछली बार भी जल संसाधन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। इस बार भी उनका विभाग बरकरार रखा गया है।

एदल सिंह कंषाना : कृषि विभाग पहली बार संभालेंगे

पावरफुल क्यों : पांचवीं बार के विधायक एवं तीसरी बार मंत्री बने एदल सिंह को कृषि विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछली बार 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट कृषि का था। शिवराज सिंह सरकार लगातार कृषि कर्मण अवार्ड जीतती रही है। प्रदेश के विकास में कृषि का सबसे बड़ा योगदान है। ग्वालियर-चंबल में सिंचाई की दिक्कत है। अब कृषि में नवाचार की जवाबदारी एदल के हाथों में होगी।

निर्मला भूरिया : महिला बाल विकास विभाग की पहली बार जिम्मेदारी

पावरफुल क्यों : 6वीं बार की विधायक निर्मला तीन बार मंत्री रह चुकी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग पहली बार संभालेंगी। पिछली बार ये विभाग सीएम रहे शिवराज सिंह के पास था। 5800 करोड़ से अधिक का बजट वाला ये विभाग महिलाओं और बच्चों से जुड़ा है।

गोविंद सिंह राजपूत : पहली बार मिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

पावरफुल क्यों : तीन बार के मंत्री रहे गोविंद सिंह पहली बार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग संभालेंगे। पीएम मोदी ने गरीबों के लिए राशन योजना की समय अवधि बढ़ा दी है। ये आम लोगों से सीधा जुड़ा विभाग है।

विश्वास सारंग : खेल विभाग पहली बार संभालेंगे, सहकारिता संभाल चुके

पावरफुल क्यों : विश्वास सारंग की खेल-कूद में रुचि रही है। खिलाड़ियों को अक्सर प्रोत्साहित करते रहते हैं। पहली बार उन्हें खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहकारिता विभाग वे पूर्व में भी संभाल चुके हैं।

इंदर सिंह परमार : पहले स्कूल शिक्षा संभाला, अब उच्च शिक्षा की जिम्मेदारी

पावरफुल क्यों : परमार को उच्च शिक्षा विभाग मिला है। ये विभाग पिछली बार डॉ. मोहन यादव संभाल चुके हैं। स्कूल शिक्षा के बजट से भले ही उच्च शिक्षा का बजट कम हो, लेकिन ये मोदी सरकार की नीति से जुड़ा विभाग है। साथ ही आयुष और तकनीकी शिक्षा विभाग भी मिला है। तीनों विभागों का पिछली बार 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट था।

राकेश शुक्ला : नवीन ऊर्जा के क्षेत्र को आगे बढ़ाने की चुनौती

पावरफुल क्यों : तीसरी बार के विधायक, पहली बार मंत्री बने हैं। इससे पहले ये विभाग हरदीप सिंह डंग के पास था। मप्र में रीवा, नीमच में सौर ऊर्जा के संयंत्र इसी विभाग के तहत आते हैं।

प्रद्युम्न सिंह तोमर : ऊर्जा मंत्री के रूप में पब्लिक कनेक्ट का फायदा

पावरफुल क्यों : पिछली बार भी ऊर्जा विभाग संभाल चुके हैं। गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ती बिजली देना सरकार के संकल्प में है। पिछली बार भी तोमर काफी सक्रिय थे। इसका इनाम फिर वही विभाग सौंपकर दिया गया है। पिछली बार ऊर्जा विभाग का बजट 16 हजार करोड़ से अधिक का था। अब बिजली में स्मार्ट तकनीक को बढ़ाने की जवाबदारी होगी।

नारायण सिंह कुशवाह : सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी विभाग पहली बार संभालेंगे

पावरफुल क्यों : चौथी बार के विधायक, तीसरी बार के मंत्री हैं। इससे पहले की सरकारों में राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। काम करने का अनुभव। पिछली बार ये विभाग ग्वालियर से ही आने वाले भारत सिंह कुशवाह के पास था।

नागर सिंह चौहान : पहली बार कैबिनेट मंत्री बने, वन एवं पर्यावरण विभाग मिला

पावरफुल क्यों : पहली बार में ही वन एवं पर्यावरण जैसा महत्वपूर्ण विभाग देकर इन पर बड़ा भरोसा जताया गया है।

चैतन्य काश्यप : उद्योगपति हैं, उद्योग जगत को बेहतर समझते हैं

पावरफुल क्यों : तीन बार के विधायक और पहली बार के मंत्री हैं। पिछली सरकार में ओमप्रकाश सखलेचा के पास इस विभाग की जिम्मेदारी थी।

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार को मिले ये विभाग, सभी पहली बार मंत्री बने

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