शिवपुरी में कल एक शराब कारोबारी का एसडीएम शिवपुरी से विवाद होने की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि शराब कारोबारी को ग्वालियर अपनी बेटी को इलाज के लिए ले जाना था। इस संबंध में जब हमने जानकारी मिलाई तो अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि इमरजेंसी केस को हम लोग तत्काल रैफर कर रहे है उन लोगों को ले जाकर इलाज कराया जा रहा है इसमें शासकीय एम्बुलेंस ले जाती है और छोड़कर आती है। वही दूसरा पहलू ये भी सामने आया कि शराब कारोबारी द्वारा एस डी एम आफिस में परमिशन के लिए किसी तरह का आवेदन जमा नहीं कराया, फिर कैसी परमिशन? जब हमने अधिकारी से बात की तो उनका कहना था कि मैं अपने घर सिर्फ 30 मिनट खाना खाने के लिए आया था इस समय कोरोना का भयानक प्रकोप है फिर मेरे घर किसी का आना और पूरी सावधानी से न आना मेरे और मेरे परिवार के लिए चिंता का विषय है। मेरे द्वारा बार-बार एक ही बात कही कि आप पहले कार्यालय में आवेदन करिये मैं दिखवा लेता हूं। लेकिन नियमानुसार प्रक्रिया अपनाने के बजाय कलेक्टर मैडम के यहां जाने की बात कहने लगे, लेकिन फिर भी मैंने बार-बार यही बात कही कि आप कार्यालय में आवेदन दीजिए। अगर इस तरह करेंगे तो भले ही आप मैडम से बात कर लीजिए मैं परमिशन नहीं दे पाऊंगा।
क्या है नियम ?
देखिए ये सबसे गौर करने वाली बात है कि परमिशन किस आधार पर देना है। ज्यादा गंभीर होने मेडिकल इमरजेंसी पर डॉक्टर रैफर टू ग्वालियर या जहाँ भी रैफर का पर्चा बनाया हो उसको 108 एम्बुलेंस लेकर जाती है और छोड़कर आती है । फिर और कोई अन्य केस में परमिशन के लिए एक आवेदन करना पड़ता है फिर उसका ऑथेंटिक कारण होना चाहिए। अधिकारी को लगना चाहिए विषम परिस्थिति इनका जाना जरूरी है तो अधिकारी द्वारा परमिशन दी जाती है। यहां बता दें कि शिवपुरी में ऐसे बहुत से केस हैं जिसमें एसडीएम शिवपुरी ने कई लोगों की मदद करते हुए लोगों को बाहर से लाने और मेडिकल इमरजेंसी में तत्काल उनको परमिशन दिलवाने में पूरा सहयोग किया है।
अपुष्ट सूत्रों की मानें तो ये परमिशन सिर्फ इनके नए शराब के काम को सेट कराने के मंसूबों से ग्वालियर जाने के लिए चाह रहे थे।




