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सेंट चार्ल्स स्कूल पर साल 2009 से एमपी बोर्ड की मान्यता नहीं, नए प्रवेश पर रोक / Shivpuri News

शिवपुरी: शहर में पोहरी रोड किनारे संचालित सेंट चार्ल्स स्कूल की एमपी बोर्ड से साल 2009 से मान्यता नवीनीकरण नहीं हुआ है। इसका खुलासा शुक्रवार को मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग के टीम के निरीक्षण में हुआ। अब शिक्षा विभाग ने स्कूल में नए प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।


साथ ही कार्रवाई का प्रस्ताव बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दिया गया है। तीन महीने पहले भी निरीक्षण में खामियां मिली थीं लेकिन शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। आईसीएससी बोर्ड से संचालित स्कूल में करीब 2 हजार छात्र पढ़ते हैं।

मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग भोपाल के सदस्य औंकार सिंह और डॉ. निवेदिता शर्मा ने शुक्रवार को सेंट चार्ल्स स्कूल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि आरटीई के तहत एमपी बोर्ड से मान्यता नवीनीकरण कराने का प्रावधान है लेकिन सेंट चार्ल्स स्कूल ने एमपी बोर्ड की मान्यता का नवीनीकरण साल 2009 से नहीं कराया है।

आयोग सदस्याें ने राज्य शासन से साल 1998 के बाद एनओसी संबंधी दस्तावेज और आरटीई संबंधित दस्तावेज मांगे तो स्कूल प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा सका। जांच कराने पर पता चला कि मान्यता का नवीनीकरण ही नहीं कराया गया है। वहीं स्कूल लैब में हार्ट और किडनी अंग मिले इस पर डॉ. निवेदिता ने कहा कि मेंढक और केंचुओं पर लैब में प्रतिबंधित है।

जिसका जवाब प्रबंधन नहीं दे सका। न ही स्टॉक रजिस्टर दिखा सका। सेंट चार्ल्स स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा भी मौजूद रहे। उधर सेंट चार्ल्स स्कूल प्राचार्य का कहना है कि उन्होंने एमपी बोर्ड से मान्यता ली थी लेकिन सूचना नहीं मिलने की वजह से नवीनीकरण नहीं करा पाए।

बिंदु जिनके चलते मान्यता रद्द करने की सिफारिश
1. शिवपुरी का यह एकमात्र स्कूल हैं जो कक्षा 12 तक आईसीएससी बोर्ड से संचालित हैं लेकिन इसकी एमपी बोर्ड से मान्यता 2009 से नहीं ली गई। आरटीई के अंतर्गत हर तीन साल में एमपी बोर्ड की मान्यता लेना या रिन्यू कराना अनिवार्य है।
2. स्कूल स्टाफ में प्रिंसिपल का नाम शामिल नहीं, उनकी सूची सिस्टर स्टाफ सूची में शामिल था। जिसका खर्च कहां से अपडेट होता है यह हिसाब नहीं मिल सका।
3. हार्ट और किडनी अंग लैब में मिले थे, पूछा तो प्रबंधन जवाब नहीं दे सका। अंगों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे। इन सब लापरवाहियों को जांच टीम ने मान्यता निरस्त करने का आधार बनाया और पंचनामा तैयार कर शिक्षा विभाग को कार्रवाई को सौंपा।

स्कूल को सील करा दिया है
तीन महीने पहले निरीक्षण में स्कूल में हार्ट, किडनी जैसे अंग मिले थे। जीव जंतुओं के यह ऑर्गन कहां से आए, स्कूल प्रबंधन इसका जवाब नहीं दे सका। शिक्षा विभाग ने 3 माह में कोई कार्रवाई नहीं की, अब निरीक्षण में एमपी बोर्ड की मान्यता नहीं मिली। इसलिए स्कूल को सील कर कार्रवाई करने का पंचनामा बनाया है, जिसे हम कलेक्टर को सौंप रहे हैं।

डॉ. निवेदिता शर्मा, सदस्य, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग

नए प्रवेश पर रोक लगा दी है
क्या कार्रवाई होना है, वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी मांगी हैं। पहले दर्ज बच्चे अभी पढ़ते रहेंगे। संयुक्त संचालक ग्वालियर को प्रतिवेदन भेज रहे हैं, वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर आगे की कार्रवाई करेंगे। फिलहाल नए प्रवेश पर रोक लगा दी है।

समर सिंह राठौड, जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी

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