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माधव नेशनल पार्क में 3 बाघ, पन्ना से लाई बाघिन रानी भी छोड़ी / Shivpuri News

शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में आज से दो नहीं तीन बाघों की दहाड़ गूंजेगी। बीती रात पन्ना टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को बाड़े बीती रात 12 बजे छोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि 10 मार्च को सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक नर और एक मादा बाघ को माधव नेशनल पार्क के बाड़े में छोड़ा था।

गौरतलब है कि सोमवार की दोपहर साढ़े तीन बजे पन्ना टाइगर रिजर्व से एक दो साल की बाघिन P-141 (12) को माधव नेशनल पार्क के लिए एक ट्रक के जरिये रवाना किया गया था। बाघिन के साथ डॉक्टर की टीम सहित रेस्क्यू दल भी रवाना हुआ था। आज रात यह दल बाघिन को लेकर रात्रि करीब 11 बजे माधव नेशनल पार्क में पहुंचा था। रात्रि 12 बजे सीसीएफ उत्तम शर्मा की मौजूदगी में बाघिन को बाड़े में छोड़ दिया गया है।

दूसरी बाघिन को भेजा गया माधव नेशनल पार्क

गौरतलब है कि माधव राष्ट्रीय उद्यान में टाइगर पुनर्स्थापना के पहले चरण के तीन बाघों की संख्या पूरी हो गई है। एक बाघिन काे पन्ना टाइगर रिजर्व से 10 मार्च को ही माधव राष्ट्रीय उद्यान में पहुंच जाना था, लेकिन स्वस्थ बाघिन को ढूंढ न पाने के कारण नहीं भेजा जा सका था। अगले दिन जो बाघिन मिली वह घायल अवस्था में थी इसलिए उसे भी नहीं भेजा जा सका। अब तीन दिन बाद पन्ना टाइगर रिजर्व में चंद्रनगर रेंज के मोटाचौकन से एक नई स्वस्थ बाघिन को ट्रेस कर लिया गया था। बाघिन पी-141 (12) की उम्र दो साल है।

पन्ना रिजर्व में बहुचर्चित थी यह बाघिन

पन्ना टाइगर रिजर्व के सीसीएफ बृजेन्द्र ओझा ने बताया कि राजकुमारी के नाम से जाने जानी वाली बागिन संख्या P-141 (12) को शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में भेजा गया है। हालांकि राजकुमारी उसका नाम नहीं है लेकिन दो साल की यह बाघिन पर्यटकों को लुभाने में शीर्ष नेतृत्व कार्य करती रही है। यह बाघिन पन्ना नेशनल पार्क में पर्यटकों के सामने बिल्कुल भयभीत नहीं होती है ओर न ही पर्यटकों भयभीत करती है। 2 साल की उम्र वाली बाघिन जिसे राजकुमारी नाम से जाना जाता है उसे रानी बनाने के लिए शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क के लिए भेजा गया है जो अपने वंश का विस्तार कर मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेगी। यह बाघिन पन्ना रिजर्व की शान रही है। माधव नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम शर्मा ने बताया कि बाघिन को ज्यादा समय तक पिंजरे में नहीं रखा जा सकता था इसी के चलते बाघिन को रात में ही एंक्लोजर में छोड़ दिया गया।

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