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एंबुलेंस बाले ने मांगे 1300 रुपए, पैसे कम थे तो बिना ऑक्सीजन बाली गाड़ी से किसान को ले गए परिजन मौत / Shivpuri News

शिवपुरी: ट्रैक्टर की टक्कर से घायल सेमरी गांव के किसान शिशुपाल सिंह की शुक्रवार को शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में मौत हाे गई। उन्हें जिला अस्पताल से जीएमसी रेफर कर देने पर परिजन ने 108 नंबर पर काॅल कर 45 मिनट इंतजार किया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। निजी एंबुलेंस वाला महज 5 किमी दूर ले जाने के 1300 रु. मांग रहा था। किसी तरह विधायक निधि वाली एंबुलेंस के चालक को 300 रु. देकर जीएमसी तक ले गए, लेकिन इस गाड़ी में ऑक्सीजन सुविधा न हाेने से किसान की हालत ज्यादा बिगड़ गई। ग्वालियर ले जाने के लिए भी सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस बार निजी एंबुलेंस वाले ने 13 हजार रु. मांगे। आखिरकार किसान ने जीएमसी हॉस्पिटल में ही दम तोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक शिशुपाल सिंह (48) पुत्र स्व. हरियाराम कुशवाह निवासी ग्राम सेमरी गुरुवार को मूंगफली बेचकर राशन सामान खरीदने शिवपुरी आया था। वह गांव के मुकेश कुशवाह की बाइक मांगकर लाया था। सामान खरीदकर लौटते समय शाम 7 बजे पोहरी रोड पर सेंट चार्ल्स स्कूल के पास एजेंसी के नए ट्रैक्टर ने शिशुपाल की बाइक को टक्कर मार दी। डायल 100 लोगों ने कॉल किया तो पुलिस पहुंच गई लेकिन खून से सने शिशुपाल को पुलिस वालों ने गाड़ी में नहीं बिठाया।

राहुल नामक व्यक्ति ने अपनी निजी गाड़ी से शिशुपाल को जिला अस्पताल भिजवाया। सूचना पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। मुंह, हाथ में चोट के साथ सिर की चोट के चलते उसे आईसीयू में भर्ती कर दिया गया, फिर डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। डायल 108 पर कॉल करने के 45 मिनट इंतजार के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं आई तो अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस वाले से परिजन ने बात की। महज 5 किमी से कम दूर जाने के एंबुलेंस वाले ने 1300 रुपए मांगे।

एक घंटे की मशक्कत के बाद विधायक निधि वाली एंबुलेंस के लिए 300 रुपए दिए, तब जाकर ड्राइवर मेडिकल कॉलेज तक छोड़ने गया लेकिन इस गाड़ी में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं थी। इस कारण शिशुपाल की हालत ज्यादा बिगड़ गई करीब 10 से 15 मिनट इलाज के बाद जीएमसी के डॉक्टर ने ग्वालियर ले जाने की सलाह दी। ग्वालियर के लिए फिर से डायल 108 पर कॉल किया। इस बार भी एंबुलेंस नहीं आई। दूसरे एंबुलेंस वाले से बात की तो वह 13 हजार रु. मांगने लगा। मृतक के बेटे गिर्राज पर महज 10 हजार रु. थे। 3 हजार रु. कम होने से एंबुलेंस वाला तैयार नहीं हुआ। आखिरकार शिशुपाल ने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया।

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