Press "Enter" to skip to content

बच्चों को परीक्षाओं के तनाव से बचाना आवश्यक : दाहिमा / Shivpuri News

* प्रतिस्पर्धा नहीं प्रयास करें : डॉ चौबे*

*माशिमं ने जारी किया टोल फ्री नम्बर

शिवपुरी। परीक्षा बच्चों की समग्र प्रतिभा का मूल्यांकन नही है,इसलिए इसे लेकर अतिशय दबाब की पारिवारिक परिस्थितियों से अभिभावकों को हमेशा बचने का प्रयास करना चाहिए।तनावमुक्त होकर सभी बच्चे परीक्षा दें इसकी जबाबदेही परिवार की भी है।माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा इस संबन्ध में एक टोल फ्री नंबर .18002330175 एवं 14425 जारी किया गया है जिस पर विशेष विशेषज्ञ उपलब्ध कराए गए है जो पाठ्यविषयों के अलावा मनोविज्ञान पर भी निःशुल्क परामर्श के लिए तैनात है। प्रदेश के सभी परीक्षार्थियों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए। यह बात आज माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की अतिरिक्त सचिव सुश्री शीला दाहिमा आईएएस ने चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 85 वी ई संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। परीक्षाओं से जुड़े तनाव पर केंद्रित इस संगोष्ठी में देश भर के बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

दाहिमा ने बताया की आजकल परीक्षा और परिणाम दोनों को लेकर हमारे बच्चों में तनाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।कतिपय अभिभावक भी बाल मनोविज्ञान को दरकिनार कर अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाब निर्मित करते है नतीजतन बच्चों को मानसिक रूप से परेशानी का सामना करते हैं।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग से भी बच्चों में संवेदनशीलता की न्यूनता की स्थिति बन रही हैं बच्चे हिंसक बन रहे हैं।विश्व स्वास्थ्य सँगठन ने इसे ड्रग,औऱ शराब जैसी लत के समकक्ष माना हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चे सोशल मीडिया का अनुशासनबद्व अनुप्रयोग करें इसके लिए अभिभावकों को भी अनुशाषित होकर प्रयोग करें। दाहिमा ने कहा कि परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन सतत औऱ अनुशासनबद्व पढ़ाई के बल पर ही संभव है इसलिए अभिभावकों को केवल परीक्षा के समय नही बल्कि साल भर अपने दायित्वों के साथ बच्चों पर ध्यान देना चाहिये।उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए एक चरणबद्ध तरीके से तैयारी करना चाहिए।परीक्षा कार्यक्रम और नियमित पढ़ाई कार्यक्रम को संतुलित ढंग से समायोजित करना चाहिये।उन्होंने बताया कि परीक्षा के समय अनावश्यक रूप से  रात्रि में जागना गलत है क्योंकि 6 से 7 घण्टे तक सोना अपने आप मे एक स्फूर्ति एवं क्षमतावर्धन का काम करता है।परीक्षा समय में बच्चे अपनी अभिरुचि एवं पसंद के कार्य भी करें।हंसी को एक औषधि बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान समय निकालकर हास्य कॉमिक एवं छोटी वीडियो देखना भी आवश्यक है।

दाहिमा  ने कहा कि अंकों की प्रतिस्पर्धा से बच्चों को बचाने के लिए हमें मिलकर काम करना चाहिये क्योंकि अंक सीमित ज्ञान में पारंगत होने की निशानी है इसलिए परीक्षाओं को बहुत तनावपूर्ण बनाने से बचा जाना चाहिए।ई संगोष्ठी का संचालन फाउंडेशन के सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने किया। डॉ चौबे ने कहा कि हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के प्रतिस्पर्धी बनाएं लेकिन इसके लिए अनावश्यक दबाब बनाने से बचना चाहिए उन्होंने कहा कि हमें समन्वित एवं संतुलित प्रयास करना चाहिए।फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ राघवेंद्र शर्मा ने कहाकि एक बेहतर जीवन के लिए केवल परीक्षा महत्वपूर्ण नही है इसके माध्यम से एक नियत निपुणता का प्रकटीकरण ही होता है।समग्र व्यक्तित्व के लिए जीवन के विविध आयाम होते है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अनावश्यक दबाब से अपने बच्चों को बचाएं।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!