शिवपुरी के नरवर में रविवार को हुए यूजीसी विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। करणी सेना और अखिल भारतीय सवर्ण समाज संगठन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सोमवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
करणी सेना के राष्ट्रीय महासचिव अतुल सिंह ने बताया कि कुशवाह समाज की शिकायत पर 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उनका आरोप है कि इनमें से 7 लोग घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि दो अन्य जिले से बाहर थे। इसके बावजूद नरवर थाना पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच किए उनके नाम एफआईआर में शामिल कर लिए।
अतुल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर में एक मीडियाकर्मी का नाम भी शामिल है। उनके अनुसार, यह युवक घटना के समय केवल वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। पत्थरबाजी के दौरान जब एक पत्थर महिला आरक्षक की ओर आया, तो उसी युवक ने उसे बचाकर चोट लगने से रोका था। इसके बावजूद उसे आरोपी बनाया गया है।
सवर्ण समाज संगठन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। इन फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एफआईआर में नामजद कई लोग घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। संगठन ने आरोप लगाया है कि नरवर पुलिस ने कथित दबाव में जल्दबाजी करते हुए बिना निष्पक्ष पड़ताल के एफआईआर दर्ज की है।
अखिल भारतीय सवर्ण समाज संगठन, जिला शिवपुरी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि मोनू सोलंकी, धीरू शर्मा, संतोष राजपूत, जैक सोलंकी, शिवम परमार, कृपाल सोलंकी और गिर्राज ठाकुर को एफआईआर से बाहर किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि वीडियो साक्ष्यों के आधार पर निर्दोष लोगों को राहत नहीं मिली, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।







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