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12 वर्षों निर्माण की बांट जोह रहा पचावली का नया पुल, पुराने पुल की मरम्मत का कार्य चल रहा कछुआ गति से, लोग हो रहे परेशान / Shivpuri News

शिवपुरी। जिले में हुई अतिवृष्टि व बाढ़ के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही कई सड़क व पुल इस बाढ़ में बह गए। कोलारस के रन्नौद-ईसागढ़ रोड स्थित पचावली गांव में बना यह पुल 100 साल से अधिक पुराना है बारिश के मौसम में सिंध नदी में पानी बढ़ने से हर बार यह पानी में डूब जाता था। यह पुल पहले से ही क्षतिग्रस्त था लेकिन बाढ़ की वजह से पूरी तरह जर्जर हो गया। यहां एक नवीन पुल भी निर्माणाधीन है लेकिन कई सालों बाद भी वह राजनीति व सरकारी अड़चनों के चलते कार्य पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान में इस पुराने पुल की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है, सरकार इसके प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। वर्तमान समय में कछुआ गति से इसका निर्माण चल रहा है।

12 वर्षों से बन रहा नया पुल, कछुआ गति से चल रहा काम

12 वर्षों से पचावली सिंध नदी पर नवीन पुल का निर्माण जारी है किंतु निर्माण एजेंसी कछुआ गति से इस काम को अंजाम दे रही है। हालांकि शासन की ओर से पूर्व में ही पुराने पुल को आवगमन रहित घोषित कर दिया गया था। फिर भी जनता की मजबूरी थी कि वह क्षतिग्रस्त हो चुके जर्जर पुल से गुजरने की, अन्यथा दूसरे रास्तों से बहुत अधिक दूरी तय करना पडती थी।

हैरत की बात तो यह है कि सांसद, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष, पूर्व जनपद अध्यक्ष, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष, पूर्व जिला पंचायत सदस्य, पूर्व मंडी अध्यक्ष सहित शिवपुरी के विभिन्ना दिग्गज नेताओं के गृह ग्रामों का रास्ता इस पुल से होकर जाता है। किंतु किसी ने पूरे मनोयोग से न तो पुराने पुल के मरम्मत के लिए प्रयास किया और न ही निर्माण एजेंसी पर ऐसा दबाव बना सके कि नवीन पुल का निर्माण पूरा हो जाता। वहीं इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से कई वर्षों से टोल वसूल किया जाना जांच की जद में होना चाहिए था।

अतिरिक्त दूरी तय करने को मजदूर लोग

पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने से अशोकनगर, भोपाल सहित लगभग आधा सैकड़ा से अधिक गांव की ओर जाने वाले वालक चालकों को 25 किलोमीटर का अतिरिक्त फेर खाकर जाना पड़ रहा है। वहीं इस पुल से आसपास के आधा सैकड़ा ग्राम भी जुड़े हुए थे लेकिन क्षतिग्रस्त होने से यहां दूसरे गांव जाने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करना पड़ती है। लोगों की मजबूरी है कि लोगों को अधिक समय लगाकर जाना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन एवं सरकार की उदासीनता के कारण कार्य धीमी गति से चल रहा है।

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