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शिवपुरी के बेटे अर्नव बंसल की मुलाकात मसूर क्रिकेटर कपिल देव से हुई / Shivpuri News

शिवपुरी: अर्नव बंसल सन ऑफ़ सचिन बंसल जो की तारकेश्वरी कॉलोनी शिवपुरी के निवासी हैं जो की इस वक़्त दुबई में रहते हैं और वहीं पर क्लास 3rd में स्टडी करते हैं अर्नव बंसल जुलाई अगस्त में अपनी स्कूल के दो महीने के छुट्टी पर इंडिया आये हुए थे इंडिया से वापसे दुबई जाते टाइम उनकी मुलाक़ात दिल्ली एयरपोर्ट पर भारत को 1983 का वर्ल्ड कप जीतवाने वाले भारतीय कप्तान  कपिल देव  से मुलाक़ात हुई

शिवपुरी के अर्नव बंसल उम्र 9 साल दुबई मै दुबई क्रिकेट अकादमी ज्वाइन करने भी वाले हैं कपिल देव ने अर्नव बंसल से मुलाकात कर उनको उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और वही बता दें कि अर्नव बंसल से कपिल देव ने कहा बच्चे देश का भविष्य है आप आपकी तैयारी जारी रखें मुझे भी आगे बढ़े और देश का नाम रोशन करें

कपिल देव (जन्म 6 जनवरी, 1959, चंडीगढ़ , भारत) एक भारतीय क्रिकेटर और अपने देश के इतिहास के सबसे महान तेज गेंदबाज हैं। वह टेस्ट (अंतरराष्ट्रीय मैच) क्रिकेट में 5,000 से अधिक रन बनाने और 400 से अधिक विकेट लेने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं। देव ने अपने राज्य हरियाणा के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया कपिल देव क्रिकेट की दुनिया के एक ऐसे शख्स हैं जिन्हें क्रिकेट में उच्च एवं सम्माननीय दर्जा प्राप्त है। कपिल देव ने भारत में पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  जब किसी ने यह नहीं सोचा था कि भारत वर्ल्ड कप में जीतेगा तब कपिल देव ने साल 1999 एवं साल 2000 के बीच 10 महीने तक भारत के कोच की भूमिका निभाई थी। कपिल देव जिन्हें लोग हरियाणा तूफान के नाम से जानते हैं। वह क्रिकेटर को क्रिकेट पिच पर कभी भी रन आउट होते हुए नहीं देखा गया था। इस खिलाड़ी ने अपने स्वास्थ्य एवं फिटनेस पर इतना खास ध्यान दिया था जिसके चलते इन्हें सेहत के कारण टेस्ट मैच से बाहर नहीं किया गया। कपिल देव दाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ-साथ दाएं हाथ के गेंदबाज भी थे, जो कि तेजी से रन बनाना पसंद करते थे। आइए जानते हैं उनके जीवन परिचय के बारे में विस्तार से। नई दिल्ली: आंखों में खुशी के आंसू छलक रहे थे, सारे बंधन टूट चुके थे, कौन खिलाड़ी है और कौन दर्शक एक पल को पता लगा पाना मुश्किल हो गया था। ऐसा होता भी क्यों नहीं, आज ही के दिन 25 जून 1983 को नया सूरज जो उगा था। कपिल देव की अगुवाई में 40 साल पहले भारत विश्व विजेता बना था। टीम के चैंपियन बनते ही स्टेडियम में बैठे दर्शक मैदान पर कूच कर गए थे। ऐसी ना जाने कितने ही किस्से और कहानियां हैं जो कितनी बार भी सुन और पढ़ लें वह हर बार रोमांचित कर जाती है।