Press "Enter" to skip to content

46 फर्जी दिव्यांग शिक्षक होंगे बर्खास्त, फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट लगाकर कर रहे नौकरी, दिव्यांगों का हक़ मारा / Shivpuri News

शिवपुरी के फुलीपुरा प्राइमरी स्कूल में पदस्थ रहे शिक्षक धरम सिंह रावत को उनके विद्यार्थी और स्टाफ एक सामान्य शिक्षक के तौर पर ही जानते रहे। कभी ऐसा नहीं लगा कि शिक्षक धरम सिंह ऊंचा सुनते हैं। लेकिन एक सरकारी फरमान से पता चला कि धरम सिंह ने कानों की दिव्यांगता बताकर नौकरी हासिल की है।

इसके बाद हुई मेडिकल जांच में वे दिव्यांग नहीं निकले। फुलीपुरा स्कूल के प्राचार्य श्रीनिवास शर्मा कहते हैं उन्होंने क्लासरूम में भी कभी मशीन नहीं लगाई। श्योपुर जिले के मॉडल स्कूल में पदस्थ रहे शिक्षक रवि शर्मा सरकारी रिकार्ड में तो वे पैर से दिव्यांग हैं। लेकिन मेडिकल जांच में उनके पैर में लचक तक नहीं बताई गई।

प्राचार्य अशोक खंडेलवाल कहते हैं- रवि के दिव्यांग होने की जानकारी मुझे भी तब चली जब उनके मेडिकल परीक्षण के लिए पत्र आया। जी हां, दिव्यांगों का हक मारकर नौकरी हासिल करने वाले 9 जिलों के 46 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है। कुछ शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी का प्रस्ताव जेडी और डीपीआई को भेजा गया है।

मेडिकल परीक्षण से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की भी नौकरी जाएगी। दरअसल, फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 162 शिक्षकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद दिव्यांग कोटे से भर्ती सभी शिक्षकों का मेडिकल कराया जा रहा है।

केस-1

शिक्षक बाेले- मैं हाथ तक नहीं हिला पाता हकीकत- हाथ आसानी से ऊपर कर लिया

शिवपुरी के शासकीय मॉडल स्कूल पिछोर में पदस्थ रहे शिक्षक अनिल गुप्ता सरकारी रिकार्ड में हाथों से दिव्यांग हैं। मेडिकल परीक्षण में वे दिव्यांग नहीं निकले । विभाग ने इनकी नियुक्ति निरस्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि उन्हें हाथ हिलाने में भी दिक्कत है। इसी बीच अचानक उनका हाथ ऊपर उठ गया।

केस-2

24 साल पहले पैरों की दिव्यांगता बताकर शिक्षक बने, अब बर्खास्त

शिवपुरी जिले के प्राथमिक विद्यालय आमई में पदस्थ रहे शिक्षक रमेश यादव सरकारी रिकार्ड में पैरों से दिव्यांग हैं। रमेश मेडिकल कराने आए तो उनके पैरों में बोर्ड ने लचक नहीं मानी। विभाग ने रमेश को बर्खास्त कर दिया । रमेश कहते हैं- 26 साल पहले भर्ती हुआ था, तब दिव्यांगता का प्रतिशत नहीं होता था।


डीईओ और जेडी के स्तर से ही मामले में कार्रवाई होनी है

दिव्यांग शिक्षकों के मामले में कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालक के स्तर से ही होनी है। नियुक्ति निरस्त करने का प्रस्ताव लोक शिक्षण में लंबित नहीं है। गलत तरीके से दिव्यांग सर्टिफिकेट लगाकर शिक्षक बनने वालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाईयां की गई हैं।
केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, मप्र

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »
More from ShivpuriMore posts in Shivpuri »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!