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अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जी की 167 वां बलिदान दिवस आदिवासी बस्ती में फल वितरण कर मनाया / Shivpuri News

1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम महानायिका अमर शहीद वीरांगना थी अवंती बाई लोधी
शिवपुरी: जिले के करैरा विधानसभा में बुधवार को लोधी समाज के द्वारा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम महानायिका अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जी के 20 मार्च 2024 को 167 वें बलिदान दिवस पर सिल्लारपुर ग्राम की आदिवासी वस्ती में पहुंचकर महारानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और गरीब वस्ती के छोटे-छोटे बच्चों व महिलाओं को फल वितरित किए गए और उनको बताया गया है अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ाई लड़ी थी और अंग्रेजों से लड़ते हुए 20 मार्च 1858 को शहीद हो गई थी। आज 20 मार्च 2024 को 167 वां बलिदान दिवस मनाया गया है
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की प्रेरणा स्रोत्र अमर शहीद महारानी वीरांगना अवंती बाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को ग्राम मनकेड़ी जिला सिवनी (मध्य प्रदेश) में जमीदार राव जुझारसिंह लोधी के घर मैं हुआ था इनकी माता का नाम नर्मदा बाई था। यह अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी।अवंती बाई को बचपन से ही तीर,तलवार,भाला,बंदूक आदि चलाने एवं घुड़सवारी करने का शौक था,उनका विवाह बाल्यावस्था में रामगढ़ के राजा श्री लक्ष्मण सिंह के पुत्र विक्रमाजीत सिंह के साथ हुआ था रानी अवंती बाई लोधी के दो पुत्र  अमान सिंह एवं शेर सिंह थे ।                                                                                 रामगढ़ में राजा लक्ष्मण सिंह का शासन 1817 से 1851 तक रहा ।                                                     
रामगढ़ राज्य की स्थापना तत्कालीन गौर शासक निजाम शाह के सेनापति मोहन सिंह लोधी ने की थी । मोहन सिंह लोधी के स्वर्गवास होने के बाद उनके पुत्र गज सिंह गद्दी पर बैठे उन्होंने 30 वर्ष तक राज्य किया। गज  सिंह के बाद उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह रामगढ़ के शासक हुए।
राजा लक्ष्मण सिंह की मृत्यु के बाद उनके एक मात्र पुत्र विक्रमजीतसिंह गद्दी पर   आसीन हुए । राजा विक्रमजीत सिंह वीर,साहसी,योग्य, कुशल शासक एवं धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे । राजा अत्यधिक धार्मिक प्रवृत्ति के होने के कारण वह अपना अधिकतर समय राजकाज के बजाय सत्संग व धार्मिक क्रियाकलापों में व्यतीत  करते थे। इस कारण राज्य का कामकाज रानी संभालने लगी थी ।  राजा विक्रमजीत सिंह असाध्य रोग से ग्रसित हो जाने के कारण मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गए । राज्य का पूरा भार रानी की कंधों पर आ गया। जब अंग्रेज वायसराय लॉर्ड डलहौजी को राजा के विक्षिप्त होने की जानकारी हुई तो उसने राजा को पागल करार करते हुए रानी को एक पत्र भेजकर राजा विक्रमजीत सिंह की मानसिक विक्षिप्तता की स्थिति में एक अंग्रेज अफसर को राज के देखने का प्रस्ताव भेजा ! निर्भीक रानी ने प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया तथा रानी ने वायसराय लार्ड डलहौजी को पत्र लिखा कि पति की अस्वस्था की स्थिति में मैं राज्य संभालने में सक्षम हूं मेरे दो नाबालिग पुत्र हैं जिनके बालिग होने तक मैं राजकाज संभालूंगी। निर्भीक रानी ने अपने अवयस्क भावी उत्तराधिकारी पुत्र अमानसिंह की ओर से शासन का कार्यभार संभाल कर कुशलतापूर्वक राज्य करने लगी । भाग्य की विडंबना देखिए कालांतर में देवयोग से राजा विक्रमाजीत सिंह का निधन हो गया
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति का आगाज पूरे देश में हो गया था । सन 1857 मे मंडला क्षेत्र में क्रांति प्रारंभ हो गई थी,राजा शंकर शाह,राजा उमराव सिंह,रानी अवंती बाई लोधी ने अंग्रेजो के खिलाफ खुलकर विद्रोह शुरू कर दिया था। मंडला के डिप्टी कमिश्नर वाडिंग्टन ने जबलपुर से सेना बुलाई और युद्ध प्रारंभ हो गया, उसकी सेना को रानी अवंती बाई की सेना ने पराजित कर दिया।परंतु वाडिंग्टन ने नागपुर और जबलपुर से फिर सेना बुलाई और जमकर ग्राम खैरी,बिछिया,देवहारगढ,रामगढ़, नारायणगंज,घुगरी की पहाड़ियों में युद्ध छिड़ गया।
रानी की सेना भारी पड़ी और वडिंगटन भयभीत हो गया देश की रक्षा ,राज्य की रक्षा की खातिर तलवार को अपने पेट में रानी अवंती बाई लोधी ने घौंप ली और वीरगति को प्राप्त हो गई।
परंतु अपने शरीर को अंग्रेजों को हाथ नहीं लगाने दी। ऐसी थी हमारी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर शहीद वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जो शहीद होकर भी अमर हो गई .
देश की स्वतंत्रता की खातिर देश की महिलाओं के साहस की प्रतीक है रानी अवंती बाई,नारी शक्ति का प्रतीक है वीरांगना रानी अवंती बाई जो निडर थी,साहसी थी और अपने राज और अपने सम्मान की रक्षा हेतु प्राणो की बलिवेदी पर चढ़ गई और मरकर भी अमर हो गई ।
20 मार्च 1858को रानी अवंती बाई शहीद हो गईं थीं।इस अवसर पर अमन लोधी,जीतेंद्र लोधी जनपद सदस्य,राजेन्द्र लोधी सरपंच बड़ोरा,दुर्ग सिंह लोधी पत्रकार,प्रदीप लोधी,हरेंद्र लोधी,अभिषेक,आजाद,विशाल,नितेंद्र,संजीव,विजय,रोशन एडवोकेट,फूल सिंह लोधी सहित सैकड़ों की संख्या में समाज बंधू उपस्थित थे।

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