
जशपुरनगर। हाथी के हमले में घायल हुई एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए लोगों को खाट में उठा कर कंधे के सहारे वाहन तक ले जाना पड़ा। दो दिन से जिले में हो रही झमाझम बारिश के बीच जिसने भी यह नजारा देखा उसके मुंह से बरबस ही निकल पड़ा, ‘ऐसा विकास पहले कहीं नहीं देखा।’
मामला कुनकुरी तहसील के ग्राम पंचायत बरडाड़ का है। इस पंचायत के आश्रित बस्ती सरायटोली में बीती रात एक दंतैल घुस आया। इस दंतैल ने घायल महिला सरिता पति मल्लू के घर पर हमला कर दिया। हमले में घर के दीवार का एक हिस्सा ढह कर महिला पर गिरा, जिससे उसका एक पैर टूट गया।
घायल महिला बगीचा तहसील के गुमरकोना गांव की निवासी है। गर्भवती होने के कारण इन दिनों वह पति के साथ अपने मायके आई हुई थी। घायल महिला को अस्पताल ले जाने के लिए परिजन सुबह होने का इंतजार करते रहे। सुबह होने पर बगीचा से सरिता के पति मल्लू के पिता बहु को अस्पताल ले जाने के लिए तिपहिया आटो किराया पर लेकर सरायटोली पहुंचे, लेकिन आटो का पहिया बस्ती से तकरीबन 4 सौ मीटर दूर थम गया।
इस बस्ती में साल भर पहले पंचायत की ओर से एक तटबंध का निर्माण किया गया था। दो दिन से हो रही बारिश में यह तटबंध और इससे लगी पूरी सड़क बह गई। इससे यह बस्ती टापू में तब्दील हो गई है। गर्भवती महिला की बिगड़ती हुई हालत को देख कर परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से महिला को खाट में लिटा कर कंधे में ढो कर आटो तक पहुंचाया।
भारी मशक्कत के बाद परिजनों ने घायल सरिता को इलाज के लिए कुनकुरी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया है। मौके पर पहुंचे वन विभाग और बादलखोल अभ्यारण्य के अमले ने पीड़ित परिवार को 5 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराई है।
इस पूरे प्रकरण में पंचायत द्वारा निर्मित तटबंध और पुलिया की गुणवत्ता को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। सरायटोली बस्ती के लोगों का कहना है कि अभी पूरा बरसात सामने खड़ा हुआ है। इस दौरान, इसी तरह की समस्या से उन्हें जूझना होगा।
दंतैल के आतंक से गांव में दहशत
जिस हाथी के हमले में कोरवा महिला सरिता घायल हुई, वह पिछले एक माह से बादलखोल अभ्यारण्य और इसके आसपास के गांवों में आतंक मचाया हुआ है। बताया जा रहा है कि यह आतातायी हाथी नाटे कद का दंतैल है। इसके हमले में एक माह के दौरान अलग अलग घटनाओं में दो लोगों की जान जा चुकी है। इसके साथ ही 2 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल करने के साथ दर्जन भर घरों को क्षतिग्रस्त कर चुका है। यह हाथी अब भी घटना स्थल के आसपास के जंगल में मौजूद है।



