
नोएडा। 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस-वे लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए अब सरकार ने सख्ती से नियमों को लागू करवाने का फैसला किया है। इसके तहत एक्सप्रेस-वे पर दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट व चार पहिया वाहन सवारों के लिए बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसका उल्लंघन करने वालों का चालान काटने के अलावा हेलमेट न होने पर दो पहिया वाहन चालकों को आगे सफर करने से रोक दिया जाएगा। प्राधिकरण ने इस नियम को सख्ती से लागू कराने के लिए सभी संबंधित जिलों के यातायात अधीक्षक को खत लिखा है।
यमुना एक्सप्रेस-वे पर आगरा क्षेत्र में रोडवेज बस हादसा होने के बाद मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेस-वे पर हादसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एक्सप्रेस-वे के सुरक्षा ऑडिट में आईआईटी दिल्ली द्वारा दिए गए सुझावों को जल्द लागू कराने के भी निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों के लिए हेलमेट व सीट बेल्ट पहनने के नियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश देते हुए गौतमबुद्ध नगर, हाथरस, अलीगढ़, मथुरा व आगरा जिले के यातायात अधीक्षक को खत लिखा है। बिना हेलमेट एक्सप्रेस-वे आने वाले दो पहिया वाहनों का चालान होगा और इसके साथ ही उन्हें आगे जाने से रोक दिया जाएगा।
यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट व 165 किमी प्वाइंट पर भी हेलमेट व सीट बेल्ट जांच की व्यवस्था की होगी। उन दो पहिया वाहनों को ही एक्सप्रेस-वे पर आने का मौका मिलेगा जिनके पास हेलमेट होगा। अगर कोई वाहन चालक एक्सप्रेस-वे पर पहुंच भी जाएगा तो उसे टोल पर रोक लिया जाएगा
डॉ. अरुणवीर सिंह (सीईओ यमुना प्राधिकरण) के मुताबिक, यमुना एक्सप्रेस-वे पर दो पहिया वाहनों के लिए हेलमेट व चार पहिया वाहन के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य है। इसका उल्लंघन करने वाले चालकों का चालान काटा जाएगा। बिना हेलमेट एक्सप्रेस-वे पर सफर की अनुमति नहीं होगी।
परिवहन विभाग ने आंचल में छिपाए 29 मौतों के गुनहगार
यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए दर्दनाक बस हादसे में 29 यात्रियों की मौत हो गई। उच्चस्तरीय समिति बनाकर जांच करा दी गई और मृत चालक की झपकी को वजह बताकर फाइल बंद कर दी। जांच रिपोर्ट पर सवाल तो शुरुआत से ही उठ रहे थे, लेकिन परिवहन मंत्री से लेकर आला अधिकारियों के पास इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। अब चश्मदीद यात्री के बयान ने संदेह खड़ा कर दिया है कि आखिर विभाग क्या छिपाना चाह रहा है और किसे बचाने की कोशिश कर रहा है।
अवध डिपो की जनरथ बस लखनऊ से दिल्ली जाते वक्त आठ जुलाई को यमुना एक्सप्रेस-वे पर आगरा में दुर्घटना का शिकार हो गई थी। डिवाइडर से टकराकर पलटी बस नाले में जा गिरी, जिसमें 29 यात्रियों की मौत हो गई। सरकार ने घटना के लिए जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई, समिति ने जांच रिपोर्ट में चालक की झपकी को हादसे काी वजह बताया था।
पिछले साल एक्सप्रेस-वे पर गुजरे 87 लाख से ज्यादा वाहन
यमुना एक्सप्रेस-वे पर साल 2018-19 में 8768743 वाहन गुजरे। इसमें 65 लाख केवल कारें थीं। जबकि दो पहिया वाहनों की संख्या 5,42239 रही। 616714 हल्के वाणिज्यक वाहन एक्सप्रेस-वे से गुजरे। इसके अलावा ट्रक व बस की संख्या 744325 रही। एक्सप्रेस-वे पर होने वाले हादसों में पचास फीसद कार के जरिये हुए हैं। इसके अलावा बीस फीसद हादसे दो पहिया वाहनों के हैं। मिनी बस के हादसे 14.8 व बस के 3.5 फीसद रहे।
एक्सप्रेस-वे पर रोजाना गुजरते हैं चौबीस हजार वाहन
यमुना एक्सप्रेस-वे पर प्रतिदिन चौबीस हजार वाहन गुजरते हैं। सप्ताहांत में वाहनों की संख्या बढ़कर 28 से 30 हजार तक पहुंच जाती है। प्रतिदिन औसतन 1486 दो पहिया व 17786 चार पहिया वाहन एक्सप्रेस-वे से गुजरते हैं। जेपी इंफ्राटेक को एक्सप्रेस-वे पर टोल वसूली में सालाना करीब साढ़े तीन सौ करोड़ की कमाई होती है।





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