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लोकसभा पहली बार लड़ने जा रहे बीजेपी प्रत्याशियों की कहानी: लता का करियर सरपंच से शुरू हुआ, 11 बार जेल गए दर्शन सिंह /#मध्यप्रदेश

भोपाल

पहली बार सीधे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे ये पांच चेहरे।

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करते हुए एक बार फिर चौंकाया है। पार्टी ने तीन बार सरपंच रह चुकीं सागर की डॉ. लता वानखेड़े को प्रत्याशी बनाया है। सरपंच के बाद अब वह सीधे लोकसभा के चुनाव में दम दिखाएंगी। वहीं अभी तक संगठन में रहकर परदे के पीछे से पार्टी प्रत्याशियों को चुनावी जीत दिलाने में लगे किसान नेता दर्शन सिंह चौधरी, आशीष दुबे और डॉ. राजेश मिश्रा पहली बार खुद के लिए वोट मांगेंगे।

भाजपा ने शनिवार को 195 प्रत्याशियों की सूची घोषित की है। एमपी की 29 सीटों में 24 पर नामों का ऐलान हो चुका है। पांच सीटें छिंदवाड़ा, उज्जैन, इंदौर, धार और बालाघाट के पत्ते अभी नहीं खोले गए हैं। पिछली बार की तुलना में इस बार पार्टी ने 11 चेहरों को बदला है। इसमें 6 मौजूदा सांसदों का टिकट काटा गया है। वहीं पांच वो सीटें हैं, जहां के सांसद विधायक चुने जा चुके हैं। ये सीटें रिक्त थीं।

दैनिक भास्कर ने मध्य प्रदेश से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे प्रत्याशियों के प्रोफाइल की पड़ताल की तो कई रोचक जानकारी सामने आई।

सरपंच से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाली वानखेड़े की कहानी

सागर से प्रत्याशी बनाई गई 54 वर्षीय डॉ. लता वानखेड़े ओबीसी कुर्मी समाज से आती हैं। वर्ष 1995 में मकरोनिया ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गईं। इस पद पर लगातार तीन बार रहीं। लता वानखेड़े अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

‘ग्रामीण महिला के सामाजिक उत्थान में पत्रकारिता की भूमिका’ पर पीएचडी कर चुकी हैं। आरएसएस की सक्रिय सदस्य रहीं। महिला आयोग की अध्यक्ष के अलावा भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। सरपंच के बाद पहली बार कोई चुनाव लड़ेंगी।

संगठन पर पकड़ रखने वाले जबलपुर के आशीष पहली बार लड़ेंगे कोई चुनाव

जबलपुर लोकसभा से पार्टी ने 54 वर्षीय आशीष दुबे को प्रत्याशी बनाया है। बीकॉम व एलएलबी आशीष दुबे पहली बार कोई चुनाव लड़ेंगे। अभी तक वे पर्दे के पीछे से रहकर रणनीति बनाते थे। पहली बार खुद के लिए वोट मांगेंगे।

ब्राह्मण समुदाय से आने वाले आशीष ने 1990 में पार्टी से जुड़े थे। भाजयुमो के 2000 में जिलाध्यक्ष रहे आशीष 2010 में जबलपुर भाजपा के ग्रामीण अध्यक्ष बनाए गए। 2021 से प्रदेश मंत्री का दायित्व संभाल रहे हैं। राइट टाउन में रहने वाले आशीष पाटन क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जबलपुर की पाटन सीट से टिकट की दावेदारी की थी।

दूसरी बार अलीराजपुर के चेहरे को मिला रतलाम लोकसभा से मौका

भाजपा ने रतलाम-झाबुआ आदिवासी सीट से वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया है। 40 वर्षीय अनीता सिंह की खुद की पहचान है। वे महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। एलएलम की पढ़ाई कर चुकी अनीता 2015 से लगातार अलीराजपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। उनके पति नागर सिंह चौहान चौथी बार के विधायक हैं। संगठन और आदिवासियों में मजबूत पकड़ के चलते उन्हें टिकट मिला है।

रतलाम लोकसभा में रतलाम-झाबुआ की तीन-तीन तो अलीराजपुर की दो विधानसभाएं शामिल हैं। अभी तक झाबुआ और रतलाम के ही प्रत्याशी सांसद चुने जाते रहे हैं। ये दूसरी बार है जब अलीराजपुर को प्रतिनिधित्व मिला है। इससे पहले अलीराजपुर के भगवान सिंह चौहान रतलाम से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।

शिक्षकों के लिए 4 तो किसानों के लिए 7 बार जेल जा चुके हैं दर्शन सिंह

होशंगाबाद से प्रत्याशी बनाए गए 49 वर्षीय दर्शन सिंह सरकारी शिक्षक रह चुके हैं। किसानों की समस्या को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। वे बचपन में ही संघ से जुड़े गए थे। उन्होंने अविवाहित रहते हुए राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया है। शिक्षक संघ के संरक्षक रहते हुए वे चार बार जेल जा चुके हैं।

दर्शन सिंह चौधरी ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ की स्थापना की और किसानों के हक में आंदोलन करते हुए 7 बार जेल गए। पांच साल पहले भाजपा ने उन्हें किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। दर्शन शास्त्र से पीजी कर चुके दर्शन चौधरी गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। दर्शन किरार ओबीसी समाज से आते हैं।

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