
दिनारा। ग्राम दुर्गापुर मैं हनुमान मंदिर के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में पांचवे दिन गुरुवार को कथा बाचका राधिका शास्त्री ने श्रद्वालुओं को भवागन श्रीकृष्ण की बाल लीला तथा रास लीला का वर्णन किया गया। कथा का वर्णन करते हुए भगवताचार्य राधिका शास्त्री ने कहा भक्त अन्नय भाव से भगवान के हो जाते हैं। भगवान उनकी सुरक्षा स्वंय करते हैं, चाहे गोवर्धन जैसा पर्वत ही क्यों न उठाना पड़े ।भगवान पहले अपने प्रेमियों से गोवर्धन भगवान को छप्पन भोग अर्पित कराते हैं, फिर जरूरत पड़ने पर वही गोवर्धन उन ब्रज वासियों की रक्षा अपनी मर्यादा तोड़कर करते हैं। स्वंय भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाकर एक तरफ जहां अपने प्रेमियो, ब्रजवासियों की रक्षा की वहीं दूसरी तरफ देवराज इंद्र का अहंकार भी चूर किये। कहा कि भगवान श्री कृष्ण गाय के संवर्धन एवं संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गोवर्धन की पूजा की क्योंकि जहां गाये होती है वहीं संपन्नता रहती है।इस मौके पर कथा के मुख्य यजमान सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।






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