दलालों का अड्डा बना आरटीओ कार्यालय

बिना दलालों के नहीं बनते लायसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट 
नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे वाहन, दुर्घटनाओं को दे रहे न्यौता

केदार सिंह गोलिया 
शिवपुरी। परिवहन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों की लापरवाही के चलते यात्री एवं लोडिंग वाहन क्षमता से अधिक सवारियां व माल ढोकर दुर्घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पूर्व में अनेक गंभीर हादसे हो चुके हैं तथा अनेकों जानें इसी लापरवाही के चलते चली गईं, लेकिन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की आदत में सुधार नहीं हुआ। घटना के कुछ दिन तक महकमा सक्रिय हो जाता है, लेकिन मामला शांत होते ही वही पुराना ढर्रा अपना लेते हैं। अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही व भ्रष्टाचारी का आलम यह है कि जो लोग दलाल के माध्यम से दस्तावेज नहीं बनवाते और सीधे अधिकारी से बनवाना चाहते हैं तो वह महीनों चक्कर लगाता रहे उसका काम नहीं होगा, लेकिन जो लोग दलालों के माध्यम से लायसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाते हैं वह रुपयों के चलते समय सीमा से भी पहले बना दिए जाते हैं। अधिकारी दफ्तर में सिर्फ फेरी देने के लिए आते हैं और कुछ देर में काली कमाई का बंदर बांट कर निकल जाते हैं।
यात्रियों से अवैध वसूली
बसों पर किराया सूची अंकित नहीं है। बसों के चालक व कंडटर मनमाने ढंग से किराया वसूल करते हैं। कई बार यात्रियों से हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। ग्वालियर जाने वाली बसों का हाल तो और भी बुरा है। 
आंखें बंद करके बनाते हैं परमिट
शहर में चल रहे ऑटो के परमिट आंखें बंद करके बनाए जाते हैं। मापदण्डों को ताक पर रखकर कम उम्र के लड़कों को ऑटो चलाने का लायसेंस कैसे मिल जाता है। फुल आवाज में साउण्ड बजाते हुए कम उम्र के लड़के वाहन चलाते हुए कभी-भी देखे जा सकते हैं।
शहर में दौड़ रहे हैं भारी वाहन
विगत कुछ दिनों पूर्व राज्य शासन के निर्देशानुसार शहर के मध्य सुबह 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिसमें पीडीएस माल वाहन एवं शासकीय निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले
वाहन शामिल नहीं है। इसके बाद भी अन्य भारी वाहन शहर के भीड़ भरे क्षेत्रों से निकल रहे हैं। इन पर कानून एवं परिवहन विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और हमेशा हादसे की संभावना बनी रहती है।
दलालों की सक्रियता
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के जिला मुख्यालय पर भारी संख्या में दलाल सक्रिय हो चुके हैं। दलालों का खेल खुलेआम चल रहा है। अधिकारियों की अनुपस्थिति में ये दलाल ही अधिकारी होते हैं। इन दलालों को दलाली देकर लायसेंस बनवाना, परमिट बनवाना, फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना जैसे सभी कार्य हो जाते हैं। अधिकारियों की सांठगांठ से मोटी कमाई करने वाले दलालों ने विभाग में अपना बर्चस्व स्थापित कर रखा है।

बाहूबली एवं नेताओं का दबदबा
शहर में ज्यादातर भारी वाहनों के मालिक कहीं न कहीं राजनीति में सक्रिय हैं या बाहूबली हैं। इसलिए परिवहन विभाग में उनका दबदबा कायम है। उनके काम के लिए अधिकारी हों या दलाल हमेशा तैयार खड़े रहते हैं। जायज या नाजायज कार्य भी करना इनके लिए बाएं हाथ का काम है। सारे नियम कानून ताक पर रखकर दलालों और अधिकारियों को इनका काम करना ही पड़ता है। जरूरत पडऩे पर रात्रिकाल में देर रात तक बैठकर भी काम करते हैं। जिसके बदले में दलालों को मोटी रकम भी मिलती है। इन सारी अनियमितताओं को देखकर स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय परिवहन विभाग अपने कर्तव्योंं के प्रति कितना उदासीन और लापरवाह है। दलाल मलाई खा रहे हैं, भारी वाहनों के मालिक ओवर लोडिंग कर राज्य शासन को लाखों का चूना लगा रहे हैं। शासन को विभाग की लापरवाही से लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता की ओर राज्य शासन का भी ध्यान नहीं है। 

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