मानवीयता शून्य हो चुके चिकित्सकों पर कब होगी कार्रवाई

शिवपुरी। पूरी तरह मानवीयता शून्य हो चुके शिवपुरी जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों पर कब तक शासन-प्रशासन मेहरवान रहेगा। रविवार-सोमवार की दर यानी रात बड़ागांव निवासी इंदिरा की मौत इलाज के अभाव में खांसते-खांसते ही हो गई, लेकिन उसे चिकित्सकों ने देखने की जहमत नहीं दिखाई और रही-सही कसर अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में शव को ऑटो में रखकर उसके गांव भेजकर पूरी कर दी।
अस्पताल प्रबंधन को डर था कि कहीं यह मामला हंगामे में तब्दील न हो जाए। ऐसा नहीं कि शिवपुरी जिला चिकित्सालय में यह नजारा पहली बार हुआ हो। अक्सर इस तरह के मामले सामने आते हैं और कुछ पल के हंगामे के बाद सबकुछ पुन: सामान्य हो जाता है। सवाल यह उठता है कि बार-बार अपने अर्कमण्य एवं लापरवाहीपूर्ण व्यवहार के लिए कु यात होते जा रहे मानवीयता शून्य इन चिकित्सकों पर प्रशासन कार्रवाई करने से क्यों डरता है। आखिर क्या वजह है कि शिवपुरी की जनता इलाज के अभाव में मरने को मजबूर है। वह भी उस जिला चिकित्सालय में जहां का प्रबंधन अपने सर्वश्रेष्ठ होने की कसीदें पढ़ते नहीं थकता। कुल मिलाकर सोमवार सुबह इंदिरा की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं, अब गेंंद शासन-प्रशासन के पाले में है कि वह इतने संवेदनशील मामले के बाद इन अर्कमण्य चिकित्सकोंं के खिलाफ क्या कदम उठाता है।




