निवेश का मंच नहीं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सेतु बनेगा ‘फ्रेंड्स ऑफ एमपी’,


इंदौर। फ्रेंड्स ऑफ एमपी निवेश का मंच नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों में अपनी प्रतिभा से स्थान बनाने वाले प्रदेश के एनआरआई के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सेतु बनेगा। मध्यप्रदेश से निकलकर जो प्रतिभाएं अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों में गई हैं, उन्हें जोड़ने का कोई मंच हमारे पास नहीं था। ऐसे लोगों से जब मैं मिला तो पता चला उनमें न केवल अपने देश-प्रदेश की संस्कृति से जुड़ने की तड़प है, बल्कि वे अपने प्रदेश के लिए कुछ योगदान भी करना चाहते हैं।मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने फ्रेंड्स ऑफ एमपी कान्क्लेव को लेकर सरकार का दृष्टिकोण इस तरह सामने रखा। बुधवार शाम को इसका उद्घाटन करने आए सीएम ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि फ्रेंड्स ऑफ एमपी का चार्टर बनेगा और अगले एक साल का एजेंडा तय होगा। इस सम्मेलन के जरिये हम प्रदेश के एनआरआई से चर्चा करेंगे और उनके अनुभवों का लाभ लेकर न्यू एमपी का निर्माण करेंगे। फ्रेंड्स ऑफ एमपी इसके लिए एक प्लेटफॉर्म बनेगा। ये सम्मेलन अब हर दो साल में होगा।
पर्यटन, एजुकेशन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो सकती है भागीदारी 
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहर से आए सभी प्रतिनिधियों से चर्चा और संवाद के बाद हम गुरुवार को फे्रंड्स ऑफ एमपी को एक आकार देंगे। पर्यटन की दृष्टि से हम चर्चा करेंगे। एजुकेशन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी संभावनाएं हैं, जिसमें एनआरआई प्रदेश में अपनी भागीदारी कर सकते हैं।उन्होंने इंदौर में शुरू होने वाले बोनमैरो ट्रांसप्लांट को लेकर एक एनआरआई डॉक्टर के योगदान का जिक्र भी किया। सीएम ने बताया कि कॉन्क्लेव में अलग-अलग देशों व अन्य राज्यों से करीब 300 प्रतिनिधि अपने खर्च से आए हैं। पिछले सालों में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में बड़े औद्योगिक घरानों की घोषणाओं के बावजूद निवेश न होने से उठे सवालों पर सीएम ने कहा कि किसी औद्योगिक समूह की माली हालत पर कहना तो ठीक नहीं, लेकिन निवेश तो हुआ है, पॉवर प्लांट लगे हैं। उन्होंने छोटे उद्यमों को भी अधिकतम रोजगार देने वाला बताया।

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