कोलारस उपचुनाव – नए चेहरे की मांग में उभरा आलोक का नामदेखें हकीकत : टिकट की आस में दावेदारी दिखा रहे दावेदारों में कितना है दम 

कोलारस उपचुनाव – नए चेहरे की मांग में उभरा आलोक का नाम
देखें हकीकत : टिकट की आस में दावेदारी दिखा रहे दावेदारों में कितना है दम 
शिवपुरी। कोलारस में उपचुनाव को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों ही जोर आजमाइश करते नजर आ रहे हैं। वहीं भाजपा के आधा दर्जन मंत्री विगत एक माह से कोलारस में डेरा डाले हुए हैं। गांव-गांव, द्वार-द्वार पर मत्था टेकते नजर आ रहे हैं। भाजपा से उम्मीदवारी में कई नाम निकलकर सामने आ रहे हैं। अभी तक कई नाम तो दबे ही हुए थे, लेकिन जैसे-जैसे पुराने नामों से रंग उड़ता नजर आ रहा है वैसे-वैसे नए चेहरे की मांग बढ़ती जा रही है। इससे पहले यह सीट कांग्रेस के खाते में थी लेकिन अब भाजपा ने कोलारस में पूरी ताकत झोंक दी है और एक महीने के अंदर लगभग 1 अरब की घोषणाओं से जनता का वोट परिवर्तन कराने प्रयास जारी है। इसके साथ ही उपचुनाव में भाजपा से अनेक प्रत्याशी अपना दम-खम दिखाकर टिकट के लिए दावेदारी जता रहे हैं। देखते हैं भाजपा से उम्मीदवारी जता रहे उम्मीदवारों का वही खाता।
आलोक बिंदल :- वर्तमान में आलोक बिंदल भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं तथा कोलारस में पहले भी नगर पंचायत चुनाव में भी इनका नाम प्रमुखता से आगे आया था। आलोक बिंदल जनसंघ के समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और पार्टी द्वारा सौंपे गए दायित्वों का उन्होंने पूर्णत: निर्वहन किया है, साथ ही इनको सभी वरिष्ठ नेता पसंद करते हैं साथ ही ग्रामीण जनों में भी इनकी छबि साफ है। अब कोलारस में उपचुनाव को लेकर दमदारी के साथ भाजपा के साथ चल रहे हैं तथा इन्हें टिकट का प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। 
रामस्वरूप रिझारी : वर्तमान में रामस्वरूप रिझारी भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं। वर्तमान में इनके हाथ में दो जिला पंचायत सदस्य की सीटें हैं जो कोलारस विधानसभा चुनाव में बहुत बड़े उलटफेर की ताकत रखते हैं साथ ही अनेक ग्रामों में भी इनकी पकड़ अच्छी है जिस कारण उपचुनाव में रामस्वरूप रिझारी की दावेदारी को भी प्रमुखता से देखा जा रहा है। 
धनपालसिंह यादव : – वर्तमान में धनपालसिंह यादव पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष हैं। अगर कोलारस विधानसभा को जातिगत समीकरणों से देखा जाए तो धनपालसिंह यादव का नाम प्रमुखता से ऊपर आता है। क्योंकि कहीं न कहीं यादवों का वोट बैंक बहुतायात में है और पूर्व विधायक भी यादव समुदाय से थे। इसलिए सिंमपेथी वोट भी धनपालसिंह को जा सकता है। 
विपिन खैमरिया : वर्तमान में विपिन खैमरिया कोलारस में भाजपा मंडल अध्यक्ष के पद पर हैं। इससे पहले खैमरिया पूर्व में भाजपा की ओर से नगर पंचायत का चुनाव लड़ चुके हैं और वह कांग्रेस के प्रत्याशी रविन्द्र शिवहरे से मात्र कुछ ही वोटों से पराजित हुए थे। कोलारस नगर में इनकी पकड़ काफी मजबूत हैं। व्यापारी वर्ग इनको पसंद करता है। मगर इनके साथ हार का जो तमगा जुड़ा हुआ है वो इनके लिए विधानसभा चुनाव में रोड़ा बना हुआ है। लेकिन इनकी भी उपचुनाव में दावेदारी देखी जा रही है। 
रामजीलाल धाकड़ : वर्तमान में रामजीलाल धाकड़ की पत्नी मंडी अध्यक्ष के पद पर हैं। कोलारस में धाकड़ समुदाय का वोट बैंक अधिक है। धाकड़ अभी तक सरपंच से लेकर अन्य चुनाव लड़े हैं जिसमें वह अभी तक पराजित नहीं हुए हैं। जिस कारण उपचुनाव में इनकी दावेदारी को भी प्रमुखता से देखा जा रहा है। 
देवेंद्र जैन : दो बार कोलारस से विधायक रहे चुके देवेंद्र जैन की दावेदारी को उपचुनाव में प्रमुखता से देखा जा रहा है। देवेंद्र जैन शुरु से ही भाजपा से जुड़े हुए हैं। जैन के साथ व्यापारी वर्ग तो अभी भी जुड़ा नजर आ रहा है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों की बात की जाए तो जिसकी वजह से पिछला चुनाव 25 हजार वोटों से हारे थे वही उनकी कोलारस उपचुनाव में की दावेदारी में रोड़ा बनती नजर आ रही है। इनको दो चुनावों में जनता टेस्ट कर चुकी है तो कहीं न कहीं जनता का टेस्ट चेंज करने का भी विचार है। 
वीरेंद्र रघुवंशी : भाजपा में बहुत ही कम समय में बड़े-बड़े नेताओं से संबंध बनाएं हैं। भाजपा उपचुनाव में विधायक की दावेदारी के लिए यह अपना पूरा जोर-आजमाइश कर रहे हैं। लेकिन इनको भाजपा के मूल उसूलों का पता नहीं है। भाजपा में शुरु से जमीनी कार्यकर्ता को तरजीह दी जाती है। इन्होंने आते ही सिर्फ बड़े-बड़े नेताओं से तो संबंध बनाएं हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं के प्रति इनका रवैया हमेशा से उदासीनता का रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा अगर इनको प्रत्याशी के रूप में उतारती है तो भाजपा का ही कार्यकर्ता इनके खिलाफ कार्य करेगा। इसका मुख्य कारण है कि यह कांग्रेस से आयतीत होकर भाजपा में आए हैं और अगर ऐसे लोगों को भाजपा प्रमुखता देती है तो जनसंघ के समय से जुड़े कार्यकर्ता और नेता पूरी तरीके से असंतुष्ट हो जाएंगे और भाजपा की सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाएंगी।