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पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में न भूलें अपनी संस्कृति- सुव्रतसागर

कोलारस। भारत देश अनेक संतों, भगवंतों की जन्मभूमि, कर्मभूमि रही है। हमारे इस भारत देश में भगवान आदिनाथ, राम, कृण, महावीर आदि भगवंतों ने एवं अनेकों संत महात्मा, महापुरुषों ने जन्म लिया है और अपने उत्कृष्ट सत्कर्मों द्वारा सर्वोच्चता को प्राप्त किया है। इन सभी महापुरुषों ने अपने सत्कर्मरूपी जल से इस भारत भूमि का सिंचन कर अनेकों आदर्श स्थापित किये हैं।
उक्त आशय के उद्गार आज होटल फूलराज परिसर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य मुनिश्री सुव्रतसागर जी ने व्यक्त किये। मुनिश्री ने कहा कि पूरे विश्व में केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे भारत माता के नाम से जाना जाता है।

हमारे पूर्वजों एवं महापुरुषों द्वारा स्थापित उच्च जीवन मूल्यों के कारण ही आज हमारे देश को विश्वगुरु कहा जाता है। परन्तु आज हमारे देश का दुर्भाग्य है कि आज देशवासी भारतीय संस्कृति को विस्मृत करके पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर अपने आपको इण्डियन कहलवाना पसंद कर रहे हैं। इण्डिया शब्द अंगे्रजों द्वारा भारतीयजनों के प्रति अपमानजनक शब्दावली के रूप में प्रयोग किया जाता था। इस प्रकार इण्डियन कहलाने से हम अपनी भारत माता का अपमान कर रहे हैं। राम, कृष्ण, महावीर की इस भारतभूमि पर हम उनके आदर्शों का अनादर कर रहे हैं।


कार्यक्रम का संचालन सौरभ जैन द्वारा किया गया। धर्मसभा के प्रारंभ में अतुल जैन द्वारा मंगलाचरण किया गया एवं श्री कुलदीप जैन एडीजे भिण्ड, वासुदेवशरण गोयल, राजमल सिंघल, राजाराम गुप्ता, भगवानदास गुप्ता, सतीशचन्द सर्राफ द्वारा आचार्यश्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया गया। समस्त उपस्थित साधर्मीजनों द्वारा मुनिश्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
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