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मुक्तिधाम में सिखाये मुनिश्री ने योग से अध्यात्म साधना के सूत्र – योग से होता है जीवन का कायाकल्प – मुनि श्री विशोक सागर जी

योगेन्द्र जैन पोहरीं-
खनियॉधाना – नगर के श्री पार्श्वनाथ दि. जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे  मुनि श्री  विशोक सागर जी महाराज एवं  विदेह सागर जी महाराज ने रविवार सुबह नगर के एकमात्र मुक्ति धाम मे योग साधना करते व कराते हुये कहा है कि योग कोई पंथ, परम्परा या धर्म नहीं, विशुद्ध रूप से जीवन जीने की कला है। योग तन को स्वस्थ करता है और मन को तंदुरुस्त। उत्साहपूर्ण एवं ऊर्जावान जीवन जीने के लिए योग बेहतरीन पद्धति है।
मुनि श्री विशोक सागर जी ने कहा कि जीवन के चार आधार हैं-शरीर, विचार, मन और भाव। ये चारों स्वस्थ हैं तो जीवन स्वस्थ है और इनमें से किसी में भी गड़बड़ी है तो व्यक्ति बीमार पड़ जाता है। योग से शरीर स्वस्थ, विचार सकारात्मक, मन शांत और भाव शुद्ध रहते हैं। अगर व्यक्ति चौबीस घण्टों में से एक घण्टा प्रतिदिन योग के लिए निकाले जिसमें 20 मिनिट योगासन , 10 मिनिट प्राणायाम और 30 मिनिट ध्यान करे तो इससे न केवल उसका कायाकल्प होगा वरन् वह स्वस्थ, सुखी और मधुर जीवन का मालिक भी बन जाएगा।
मुनिश्री ने कहा कि शरीर को सदाबहार स्वस्थ रखना है तो सात्त्विक एवं संतुलित आहार लें, प्रतिदिन योगासन एवं प्राणायाम करें, समय पर शौच से निवृत होवें और हमेशा स्नान करें। विचारों को बेहतरीन बनाने के लिए अच्छी किताबें पढ़ें, अच्छी बातें सुनें और अच्छे लोगों के साथ रहें। मन को निर्मल और ऊर्जावान बनाने के लिए प्रभु-प्रार्थना एवं ध्यान करें और भावों को सुंदर बनाने के लिए सबके प्रति मंगल-मैत्री भाव और परोपकार की भावना रखें। इससे व्यक्ति 80 प्रतिशत रोगों का ईलाज करने वाला चिकित्सक तो खुद बन जाएगा।
मुनि श्री विशोक सागर जी ने सभी श्रद्धालुओं को योगसन के विभिन्न प्रयोग करवाए। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास मात्र तीन मिनिट है तो एक-एक मिनिट केघर्षण योग, ताल वादन योग और हास्य योग के प्रयोगों से तन-मन को स्वस्थ और सकारात्मक बनाया जा सकता है। ब्लडप्रेशर नियंत्रण, बौद्धिक विकास, डासबिटिज, मोटापा व ऊर्जा जागरण के लिए विभिन्न योगासन का प्रयोग करवाया गया ।

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