शिवपुरी। हरियाणा के गुरुग्राम के रेयान स्कूल में स्कूली छात्रप्रघुम्न ठाकुर की मौत के बाद देशभर में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को
लेकर उठ रही आवाज की गूंज शिवपुरी के पुलिस व प्रशासन के कानों तक भी जा
पहुंची है। पुलिस व प्रशासन ने स्कूलों व स्कूल वाहनों में बच्चों की
सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए बुधवार को स्कूल संचालकों की मैराथन
बैठक पुलिस कंट्रोल रूम में ली। इस बैठक में सुरक्षा इंतजामों को लेकर
जानकारी भी तलब की गई थी, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालक जानकारी लेकर नहीं
आए, जिन्हें सात दिन में ये जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। बैठक में
एसपी सुनील पांडे ने स्पष्ट किया कि घर से स्कूल बस में बैठने और वापस घर
आने तक बच्चे की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। इस मामले में कोई कोताही न
बरती जाए। बैठक में ये भी तय किया गया कि वाहनों के स्टाफ, माली का प्रवेश
स्कूल भवन के भीतर प्रतिबंधित रहेगा। इस स्टाफ के लिए टॉयलेट की व्यवस्था
भी परिसर से बाहर की जाए। बैठक में एसपी के अलावा बाल कल्याण समिति के
अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन, मानव अधिकार आयोग के आलोक एम इंदौरिया, एडिशनल एसपी
कमल मौर्य, परिवहन अधिकारी विक्रमजीतसिंह कंग, महिला सशक्तिकरण अधिकारी
ओपी पांडे, एसडीओपी जीडी शर्मा सहित तीनों थाने के थाना प्रभारी व अन्य
अधिकारी मौजूद थे।
सात दिन में देनी होगी ये जानकारी
-स्कूल में छात्र-छात्राओं की संख्या व स्टाफ की जानकारी।
-स्कूल में बच्चों को लाने ले जाने के लिए बसें व ऑटो की संख्या, ड्राइवर कंडक्टर की जानकारी पते व मोबाइल नंबर सहित।
-वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता, फायर इक्युपमेंट की जानकारी।
-स्कूल में स्वीमिंग पूल है तो उसके ट्रेनर व अटेंडर की जानकारी।
-स्कूल में बाउंड्रीवाल है अथवा नहीं व सुरक्षा गार्ड की जानकारी नाम, पते व मोबाइल सहित।
-स्कूल में सीसीटीवी कैमरे की उपलब्धता व संख्या की जानकारी, साथ ही स्कूल के आसपास शराब की दुकान है या नहीं उसकी जानकारी।
-स्कूल में कार्यरत कर्मचारियों का वेरीफिकेशन हुआ है अथवा नहीं।
-निजी स्कूलों में छात्रवास की सुविधा है, उनमें रात के समय ड्यूटी पर रहने वाले सभी कर्मचारियों की पुलिस वेरीफिकेशन कराई जाए।
-स्कूलों में कार्यरत स्टाफ व बच्चों के पहचान पत्र जारी किए जाएं।
बच्चों को गोद में न बैठने दें
बैठक
में महिला सशक्तीकरण अधिकरी ओपी पांडे ने कहा कि वाहन के स्टाफ द्वारा
छेड़छाड़ की अक्सर शिकायतें सामने आती हैं। इस तरह के वीडियो भी सामने आए हैं
जिनमें बच्चों को गोद में बिठाने के बाद आपत्तिजनक हरकत की जाती हैं। इन
कारणों से हमें यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे किसी भी हाल में स्टाफ के
करीब या गोदी में नहीं बैठेंगे। इसके लिए महिला टीचरों को भी सावधानी रखनी
होगी।
एएसपी बोले स्टाफ के टॉयलेट बच्चों से अलग हों
एएसपी
कमल मौर्य ने कहा कि स्कूल में स्टाफ के टायलेट अलग होना चाहिए, वाहन चालक,
कंडक्टर और सफाई कर्मचारी के टॉयलेट स्कूल के बाहर ही हों तो बेहतर होगा।
जिससे उनकी अंदर एंट्री प्रतिबंधित की जा सकेगी। उन्होंने स्कूल के प्रवेश
द्वार पूरी तरह सुरक्षित बनाने की बात भी कही। स्कूल के समीप शराब की दुकान
की निगरानी की जाए।
स्टाफ बदले तो वेरीफिकेशन हो
स्कूल वाहन
का स्टाफ यदि बदलता है तो तत्काल वेरीफिकेशन कराएं। एक व्यक्ति की यह
आवश्यक डयूटी लगाई जाए कि वह वाहनों पर नजर रखे और कोई बच्चा न आए तो
तत्काल उसकी जानकारी ली जाए। बालक, बालिका सहित स्टाफ को नियमों की पूरी
जानकारी दी जाएं और अवकाश के दिन उन्हें ट्रेनिंग दी जाए।
सुरक्षा गार्ड का भी वेरीफिकेशन हो
अधिकारियों
ने कहा कि स्कूल में तैनात सुरक्षा गार्ड की मानसिकता परखी जाए, वहीं उसके
चरित्र का सामाजिक वेरीफिकेशन भी कराया जाना चाहिए। इसके अलावा चालक और
कंडक्टरों का भी पुलिस वेरीफिकेशन कराया जाए। ऑनलाइन यह संभव है।
बस में जितनी सीट उतने बच्चे, ऑटो में 5
स्कूल
में बसों में जितनी सीटे होंगी उतने ही बच्चे बैठाने का फरमान सुनाया गया
है, वहीं ऑटो में 5 से अधिक बच्चे न बैठाने की हिदायत दी गई है।
गेट और अंदर सीसीटीवी लगाएं
स्कूल
के वाहन स्टाफ पर नजर रखने के लिए स्कूल के बाहर और अंदर भी द्वार के
अलावा सीसीटीवी कैमरे लगाना सुनिश्चित किया जाए। इसे लेकर स्कूल संचालक
अशोक ठाकुर ने पूछा कि किसी खास कंपनी के सीसीटीवी तो नहीं लगाए जाने हैं,
जिस पर आरटीओ ने कहा कि ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। स्पीड गवर्नर के लिए
कोर्ट से मापदंड तय किए थे, इसलिए उन्हें बदला गया है।
घटना का अंदेशा हो तो डायल 100 बुलाएं
स्कूल
में यदि किसी तरह के झगड़े के हालात दिखें तो डायल 100 को फोन लगाया जाए।
संभव हो तो 15 मिनिट पहले जानकारी दें, जिससे तत्काल डायल 100 मौके पर
पहुंचेगी। इस मौके पर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया
कि बच्चों के साथ क्रूरता पर जुर्माना और एक साल की सजा का प्रावधान है।
वहीं पास्को एक्ट भी बच्चों की हिफाजत के लिए बनाया गया है। इसलिए बच्चों
की सुरक्षा हर हाल में तय की जाए। स्कूल में आगंतुकों का भी लेखा जोखा रखा
जाए।
अभी भी हरे हैं उत्सव हत्याकांड के जख्म
प्रद्युम्न की
मौत जैसा ही घटनाक्रम शिवपुरी में भी 7 साल पहले घटित हो चुका है, जब
हैप्पीडेज स्कूल के छात्र उत्सव का अपहरण उसी को स्कूल ले जानी वाली वैन के
ड्राइवर ने कर लिया था और बाद में उसकी हत्या कर शव सिंध नदी में फेंक
दिया था। इस हत्याकांड के बाद शहर जल उठा था और जमकर तीन दिन तक उपद्रव भी
हुआ था। तत्समय स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने तमाम
दावे किए थे, लेकिन बाद में यह सब विसार दिए गए। इस हत्याकांड का मुख्य
आरोपी आज भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।






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