नई दिल्ली।
यूपी में दो ट्रेन हादसों के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने अपने इस्तीफे
की पेशकश की है। हालांकि, पीएम ने उन्हें फिलहाल इंतजार करने के लिए कहा
है। माना जा रहा है पीएम मोदी इस मामले में सितंबर से पहले फैसला ले सकते
हैं। खबरों के अनुसार महीने के अंत तक पीएम अपनी कैबिनेट का विस्तार करने
वाले हैं और इसी दौरान रेल मंत्रालय को लेकर वो कोई फैसला ले सकते हैं।
वहीं इस फेरबदल में सबकी निगाहें रक्षा मंत्रालय पर भी हैं।
चार
दिन पहले मुजफ्फरनगर के भयानक रेल हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रेल
मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने उन्हें इंतजार करने को कहा है। माना जा रहा है कि जल्द
होने वाले कैबिनेट विस्तार के वक्त ही प्रभु की पेशकश पर फैसला होगा। संकेत
है कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा। वैसे
बताते हैं कि
मुजफ्फरनगर के बाद बुधवार सुबह औरैया में हुई रेल दुर्घटना से प्रधानमंत्री
सख्त नाराज हैं। उनकी इस नाराजगी का असर ही था कि शीर्ष स्तर तक हिल गया।
दोपहर तक रेल मंत्री ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने खुद ही ट्वीट
कर इसकी जानकारी दी।
प्रभु ने लिखा, ‘मैंने प्रधानमंत्री से मिलकर
घटना की नैतिक जिम्मेदारी ले ली है। प्रधानमंत्री ने इंतजार करने को कहा
है।’ ट्वीट में उन्होंने इस्तीफे की बात नहीं की है। लेकिन, नैतिक
जिम्मेदारी लेने का अर्थ इस्तीफा ही माना जा रहा है। वहीं वित्त ने प्रभु
की पेशकश पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि सरकार में जवाबदेही अच्छी बात
है।
वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा
है कि प्रभु को जाना पड़ सकता है। प्रभु ने अलग अलग ट्वीट में यह भी बताया
कि प्रधानमंत्री जिस सोच के साथ रेलवे को आगे ले जाना चाहते हैं, यह उसी पथ
पर है। पिछले तीन सालों में उन्होंने अपना खून-पसीना बहाकर इसे मजबूती
देने की कोशिश की है।
सूत्रों के अनुसार, अगले तीन-चार दिनों में
कैबिनेट विस्तार हो सकता है। इस दौरान कुछ नए मंत्री जोड़े जाएंगे, तो कुछ
हटाए भी जाएंगे। कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे। प्रभु भी इसका
हिस्सा हो सकते हैं। प्रभु मामले में फैसले को कैबिनेट विस्तार से इसलिए भी
जोड़ा जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी विपक्ष के दबाव में कोई फैसला
नहीं लेंगे।
विपक्ष लगातार प्रभु का इस्तीफा मांग रहा है। ऐसे में
प्रभु का इस्तीफा होता है, तो विपक्ष इसे अपनी जीत के रूप में पेश करेगा।
सरकार विपक्ष को यह मौका नहीं देगी।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का इस्तीफा
चार
दिन में दो बड़ी रेल दुर्घटनाओं के बाद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अशोक कुमार
मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की भूमिका काफी
दिनों से बन रही थी। उन्हें पिछले साल जुलाई में चेयरमैन पद से
सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति के जरिए दो वर्ष का सेवा विस्तार दिया
गया था। लेकिन, हाल के रेल हादसों के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय उनसे
नाराज था और उन्हें पदमुक्त करने के बारे में सोच रहा था। उन्हें रेल विकास
प्राधिकरण का चेयरमैन बनाने की पेशकश भी की गई थी।
अश्विनी लोहानी को दी गई कमान
-सरकार ने एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया है।
-लोहानी मूल रूप से रेलवे सेवा (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) के अधिकारी हैं।
-कई डिग्रियों के स्वामी लोहानी को उनकी विशिष्ट प्रबंधकीय योग्यताओं के लिए जाना जाता है।
-एयर इंडिया के सीएमडी के तौर पर वे इसे आपरेटिंग लाभ की स्थिति में लाने में कामयाब रहे।
-शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ द्वारा अभद्रता मामले में भी उन्होंने सख्त रुख दिखाया था।
बंसल भेजे गए एयर इंडिया
अश्विनी
लोहानी के रेलवे बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जगह पेट्रोलियम
मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव राजीव बंसल को एयर इंडिया की कमान दी गई है।
स्थायी सीएमडी की नियुक्ति होने तक वे एयर इंडिया का काम देखेंगे। उनकी
नियुक्ति तीन महीने के लिए की गई है।
मोदी का कैबिनेट विस्तार जल्द, रेल और रक्षा मंत्रालय में फेरबदल संभव
टैग: नई दिल्ली



