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पहली बार इतनी रात में किसी राज्य की पूरी कैबिनेट ने एक साथ ली शपथ, फूट-फूटकर रोए मुख्यमंत्री

पहली बार इतनी रात में किसी राज्य की पूरी कैबिनेट ने एक साथ ली शपथ, फूट-फूटकर रोए मुख्यमंत्री

तमिलनाडु की दिवगंत मुख्यमंत्री जयललिता के सोमवार रात 11.30 बजे निधन की घोषणा के बाद देर रात 1.15 बजे वित्त मंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने आंखों में आंसुओं के साथ राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. भारत के इतिहास मेंशायद यह पहली घटना होगी, जब इतनी देर रात किसी मुख्यमंत्री और 31 मंत्रियों वाली उसकी पूरी कैबिनेट को एक साथ शपथ दिलाई गई हो.
जयललिता के निधन के कुछ ही घंटों के भीतर पन्नीरसेल्वम को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के विधायक दल का नेता चुना गया. राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने राजभवन में एक सादे समारोह में उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई.
चायवाले से नेता बने पन्नीरसेल्वम ने तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. पन्नीरसेल्वम जयललिता के वफादार रहे हैं. पूर्ववर्ती जयललिता मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. पन्नीरसेल्वम ने जब मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तब उनकी जेब में जयललिता की तस्वीर रखी थी. शपथ ग्रहण के बाद पन्नीरसेल्वम खूब रोते हुए देखे गए.
भ्रष्टाचार के मामलों में जयललिता को दोषी करार दिए जाने के बाद बेहद अहम भूमिका निभाते हुए वह इससे पहले भी दो बार राज्य की कमान संभाल चुके हैं.

चाय की दुकान चलाते थे पन्नीरसेल्वम

पन्नीरसेल्वम प्रभावशाली मुदुकुलाथोर समुदाय से हैं और बेहद मामूली पृष्ठभूमि से आते हैं. वह अपने गृहनगर पेरियाकुलम में चाय की दुकान चलाते थे. इस दुकान को आज उनका परिवार चलाता है.

जयललिता के भरोसेमंद रहे पन्नीरसेल्वम

जयललिता को देवी के समान मानने वाले पन्नीरसेल्वम उनके प्रति समर्पण भाव रखते थे, उनकी हर बात मानते थे और उनके लिए रोते थे. उनके आदेशों का पालन पूरी निष्ठा के साथ करने वाले पन्नीरसेल्वम ने नौकरशाहों के साथ समन्वय करते हुए खुद को एक परिपक्व नेता और नेतृत्वकर्ता साबित किया. उनके इन गुणों के चलते ही उन्हें सितंबर 2011 और सितंबर 2014 में कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया गया था.

 सरल स्वभाव है पन्नीरसेल्वम की पहचान

विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद वर्ष 2001 में पहली बार मंत्री बनने वाले पन्नीरसेल्वम को जयललिता ने अहम राजस्व विभाग सौंपकर उनमें अपने विश्वास का संकेत दे दिया था. पन्नीरसेल्वम में अपने विश्वास को बढ़ाते हुए जयललिता ने वर्ष 2011 में उन्हें वित्त विभाग और लोक निर्माण विभाग जैसे बड़े विभाग भी सौंप दिए थे. विपक्ष में रहने के दौरान भी पन्नीरसेल्वम वर्ष 2001-2006 तक दूसरे नंबर (अन्नाद्रमुक विधायी दल के उपनेता) के नेता रहे. हमेशा से सरल और हंसमुख स्वभाव के रहे पन्नीरसेल्वम को दलगत राजनीति से परे सभी से सम्मान मिला है.

पहली बार ऐसे मिली थी कुर्सी

जयललिता को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिए जाने पर कुछ समय के लिए पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री पद संभालना पड़ा था. वित्तीय मामलों में राज्य की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए वित्त मंत्री के रूप में उनके द्वारा किया गया संचालन खासतौर पर अहम रहा है. वर्ष 2011 और 2014 में जब जयललिता को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी करार दिया गया तो उन्होंने अपनी कुर्सी के लिए पन्नीरसेल्वम को चुना. लेकिन अदालतों द्वारा जयललिता को दोनों मामलों में बरी किए जाने के बाद पन्नीरसेल्वम ने भी एक वफादार सिपाही की तरह उन्हें सत्ता की कमान वापस सौंप दी. इस साल भी 22 सितंबर को जब जयललिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो 12 अक्टूबर को एक बार फिर पन्नीरसेल्वम को जयललिता के विभाग, गृह विभाग और पुलिस की जिम्मेदारी सौंप दी गई. उन्हें मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता की जिम्मेदारी भी सौंपी गई.

पार्टी को जोड़कर रखना सबसे बड़ी चुनौती

माना जा रहा है कि जयललिता के निधन के बाद अब तीसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने ओ पन्नीरसेल्वम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अन्नाद्रमुक को एक साथ जोड़कर रखने की है. पार्टी सुप्रीमो जयललिता की गैरमौजूदगी में अन्नाद्रमुक अब अपने आप को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रही है.

जगदंबिका पाल भी रातोंरात बने थे सीएम

इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी 21-22 फरवरी 1998 को कल्याण सिंह की सरकार के तख्ता पलट के बाद रातोंरात अचानक जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. लेकिन वो ज्यादा दिन तक सत्ता सुख नहीं भोग पाए थे और उन्हें तीन दिन बाद ही यह इस्तीफा देना पड़ा था.
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