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सिर्फ नाम का मॉडल स्कूल न बिजली न पानी, असुविधाओं के बीच पढने को मजबूर सैकड़ों विद्यार्थी

करैरा। नगर के विद्यार्थियों की सुविधा देखते हुए शासन ने नवीन मॉडल स्कूल के भवन
निर्माण हेतु तीन करोड़ की भारी भरकम राशि दी और  इसी राशि से नवीन भवन
बनकर भी तैयार हो गया लेकिन निर्माण एजेंसी व स्थानीय प्रशासन के उदासीन
रवैए के कारण यह मॉडल स्कूल सिर्फ नाम कर बनकर रह गया। क्योंकि वर्तमान में
इस मॉडल स्कूल में कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक
स्कूल में न तो पेयजल की सुविधा है और न बिजली कनेक्शन। ऐसे में आसानी से
समझा जा सकता है कि यहां अध्ययनरत 276 बच्चे कैसे वातावरण में अध्ययन करने
को मजबूर हैं। 
दो किमी का कष्ट दायक सफर
मॉडल स्कूल में
अध्ययनरत 276 बच्चों की परेशानी अपने घर से ही शुरू होती है क्योंकि नगर से
स्कूल पहुंच मार्ग की हालत बेहद दयनीय है, जिसकी दूरी करीब 2 किमी है। यह
सफर तय करने के बाद जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो वहां उन्हें न तो पीने
का पानी मिल पाता है और न हवा। क्योंकि स्कूल में बिजली कनेक्शन न होने से न
तो पंखे चल पाते हैं और न ही ट्यूबवैल। स्कूल में अन्य सुविधाओं की बात
करें तो बच्चों के अनुसार स्कूल में न तो खेल सामग्री उपलब्ध है और न ही
प्रयोगशाला के लिए जरुरी उपकरण।

फैक्ट फाइल
मॉडल स्कूल की लागत- 3 करोड़
विद्यार्थियों की संख्या- 276
शिक्षकों की संख्या- 02

हमने आला अधिकारियों को अवगत कराया है
नवीन
मॉडल स्कूल भवन में 15 जून 2017 से कक्षाएं संचालित हो रही हैं। विद्यालय
में वर्तमान में बहुत सी समस्याएं हैं। जिनमें प्रमुख रूप से पानी व बिजली
की समस्याएं हैं। बिजली कनेक्शन न होने से बच्चों को गर्मी में अध्ययन करना
पड़ रहा है। साथ ही ट्यूबवैल की मोटर न चलने से पानी की समस्या बनी हुई
है। इसके अलावा हाइवे से स्कूल पहुंच मार्ग की हालत भी ठीक नहीं है। इन सभी
समस्याओं से हम शिक्षा विभाग, एसडीओ तथा बिजली कंपनी के आला अधिकारी से
लेकर एसडीएम को लिखित में अवगत करा चुके हैं।
पूजा शर्मा, प्राचार्य

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