नई दिल्ली

संसद में बजट सेशन का आज आखिरी दिन है। सुबह 11 बजे लोकसभा की शुरुआत राम मंदिर निर्माण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के साथ हुई। दोपहर 2:30 बजे गृह मंत्री अमित शाह 30 मिनट बोले। उन्होंने कहा- 22 जनवरी का दिन 10 सहस्त्र सालों के लिए ऐतिहासिक दिन बनने वाला है। ये सबको समझना चाहिए। जो इतिहास को नहीं पहचानते हैं, वो अपने वजूद को खो देते हैं।
22 जनवरी का दिन 1528 से शुरू हुए संघर्ष और अन्याय के खिलाफ आंदोलन के अंत का दिन है। न्याय की लड़ाई यहां समाप्त हो गई। शाह से पहले AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने दो बार बाबरी मस्जिद जिंदाबाद के नारे लगाए। शाह की स्पीच शुरू होते ही वो सदन से चले गए। शाम 5 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्पीच दे सकते हैं।
इससे पहले राज्यसभा में चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने पर चर्चा हुई। इस दौरान चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने वर्चुअली चौधरी चरण सिंह का अपमान किया, मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा। आपका विरोध, नारेबाजी मैंने अपनी आंखों से देखा है। आपने सदन में जैसा माहौल बनाया, उससे हर किसान को चोट पहुंची।
लोकसभा में राम मंदिर पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए ही बजट सेशन एक दिन बढ़ाया गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यपाल सिंह ने चर्चा की शुरुआत की। सत्यपाल ने कहा- पीएम मोदी के आने के बाद रामराज्य आया है।
ओवैसी ने संसद में दो बार बाबरी मस्जिद जिंदाबाद के नारे लगाए
सदन में ओवैसी ने कहा- शिंदे गुट के नेता कह रहे हैं, कि जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई उस वक्त तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव पूजा कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि, उन्हें डिस्टर्ब न किया जाए। आज मोदी सरकार उन्हीं को भारत रत्न दे रही है। मैं कहना चाहता हूं कि, इंसाफ जिंदा है या जुल्म को बरकरार रखा जा रहा है।
ओवैसी ने कहा- मैं सवाल पूछना चाहता हूं कि क्या भारत सरकार का कोई मजहब है। ये सिर्फ एक धर्म की सरकार है या सभी को साथ लेकर चलने वाली है।
मोदी सरकार मुसलमानों को संदेश दे रही है कि, आप जान बचाना चाहते हो या इंसाफ चाहते हो। मैं कहता हूं कि मैं भीख नहीं मागूंगा। पीएम आज जब जवाब देंगे तो क्या सिर्फ हिंदुत्व से जुड़े लोगों को जवाब देंगे या 140 करोड़ लोगों को जवाब देंगे। अंत में ओवैसी ने लोकसभा के अंदर दो बार बाबरी मस्जिद जिंदाबाद के नारे लगाए।
शाह बोले- आज मैं देश की आवाज सदन में रखना चाहता हूं
आज मैं मेरे मन की बात और देश की आवाज को सदन के बीच रखना चाहता हूं। ये सालों से कोर्ट के कागजों में दबी हुई थी। नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसे आवाज भी मिली अभिव्यक्ति भी मिली।
22 जनवरी का दिन 10 सहस्त्र सालों के लिए ऐतिहासिक दिन बनने वाला है। ये सबको समझना चाहिए। जो इतिहास को नहीं पहचानते हैं, वो अपने वजूद को खो देते हैं।











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