शिवपुरी: मध्य प्रदेश की ईको पर्यटन विकास बोर्ड और वन विभाग ने माधव राष्ट्रीय उद्यान में ‘अनुभूति कार्यक्रम 2024-25’ का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को प्रकृति, वन्य जीवन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था।
कन्या उमावि आदर्श नगर और मझेरा के छात्रों को जंगल भ्रमण का अवसर मिला, जहां उन्होंने जैव विविधता और वनस्पतियों को करीब से देखा। रेंजर गोपाल सिंह ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की महत्ता समझाई। डिप्टी रेंजर बाबूलाल नरवरिया ने बच्चों को जंगल की संरचना और वन्य जीवों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। भ्रमण के दौरान बच्चों ने सख्या सागर झील की दयनीय स्थिति देखी और चिंता जताई कि इस कारण शिवपुरी का रामसर साइट का दर्जा खतरे में पड़ सकता है।
आने वाली पीढ़ी के लिए भी आवश्यक
सीएफ श्रीवास्तव ने बच्चों को बताया कि यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने वन्य जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा करें। उन्होंने कहा वनों और जंगली जीवन का संरक्षण हम सभी के लिए आवश्यक है क्योंकि यह न केवल हमारे पर्यावरण के लिए बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए कहलाती है बाकड़े कोठी
कार्यक्रम के दौरान बच्चों से जॉर्ज कैसल बाकड़े कोठी के बारे में भी सवाल पूछा गया। बच्चों ने इसका सही उत्तर दिया कि इस ऐतिहासिक इमारत का आर्किटेक्ट डिजाइन सरदार बाकड़े द्वारा तैयार किया गया थाए इसलिए इसे बाकड़े कोठी के नाम से जाना जाता है।
पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है
कार्यक्रम के समापन पर वनसंरक्षक श्रीवास्तव ने बताया कि बाघों की उपस्थिति से वन क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि वनों का संरक्षण न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि समग्र पर्यावरण के लिए भी आवश्यक है।
बच्चों ने माधव राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के वर्षों और वन्य जीवों को भी देखा और उनके बारे में नई जानकारी प्राप्त की। इस कार्यक्रम ने बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने और उन्हें प्रकृति के महत्व को समझाने का एक अद्भुत अवसर प्रदान किया। बच्चों ने क्विज और भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया और पुरस्कार भी जीते।
माधव नेशनल पार्क में अनुभूति कार्यक्रम में पहुंचे स्टूडेंट्स: वन विभाग के अधिकारियों ने सिखाया जंगल का महत्व / Shivpuri News




