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बेटे की मौत पर समाज न शव उठाने आया न अतिंम संस्कार में की मदद, अंतर्जातीय विवाह करने की मिल रही सजा / Shivpuri News

शिवपुरी के अमोला में एक आदिवासी महिला को 20 साल पहले की गई अंतर्जातीय शादी का दंश आज भी झेलना पड़ रहा है। महिला के 12 वर्षीय बेटे की मौत हो गई, लेकिन न तो समाज के लोगों ने उसका शव उठाने में मदद की और न ही उसके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। चार साल पहले महिला के पति की मौत के समय भी यही स्थिति थी।

बेटे की मौत पर समाज ने किया किनारा

इस शादी के बाद से समाज ने अशोक और उनके परिवार से दूरी बना ली थी। अशोक के निधन के बाद काजल अपने तीन बेटों के साथ मजदूरी कर परिवार का गुजारा कर रही थी। हाल ही में उनके 12 वर्षीय बेटे अमित की बीमारी से मौत हो गई।

अमोला निवासी अशोक पांडेय ने लगभग 20 साल पहले काजल नामक आदिवासी महिला से शादी की थी। इस शादी से खफा होकर समाज ने अशोक पांडेय और उसके परिवार से किनारा कर लिया था। इसके बाद अपनी पत्नी काजल के साथ अमोला कॉलोनी 1 में रहने लगा। उनके तीन बेटे हैं, लेकिन 2020 कोरोना काल में अशोक की मौत हो गई। तब से काजल अपने तीन बेटों के साथ रह रही थी और मजदूरी कर जैसे तैसे अपना और अपने परिवार का पेट पाल रही थी। महिला का सबसे बड़ा बेटा सोनू 18 साल का हैं। दूसरा बेटा अमित 12 साल का हो चुका था वहीं एक सबसे छोटा 8 का बेटा भी हैं।

कई दिनों से बीमार था दूसरा बेटा

जानकारी के मुताबिक पति की मौत के बाद उसके 12 साल का बेटा अमित को बीमारी रहने लगा, उसका इलाज चल रहा था। ऐसे में गुरुवार को काजल अपने बेटे अमित को लेकर कोलारस क्षेत्र में मजदूरी करने गई हुई थी। तभी अमित की तबीयत बिगड़ गई। तब उसे घर लाने के दौरान उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। लेकिन सड़क से घर तक बच्चे का शव ले जाने के लिए कोई ग्रामीण नहीं आया। तब काजल और उसका बड़ा बेटा जैसे तैसे उसके शव को लेकर घर पहुंचे।

वहीं समाज और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार में भी मदद नहीं की। महिला और उसका बड़ा बेटा किसी तरह शव को घर तक लेकर आए। शाम होने तक भी कोई ग्रामीण या समाज का व्यक्ति अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। अंत में, सरपंच अतर सिंह ने पहुंचकर अंतिम संस्कार करवाया और खुद चिता को आग दी।

पति की मौत में भी शामिल होने नहीं आया था समाज

इससे पहले 2020 में, जब काजल के पति अशोक पांडेय का निधन हुआ था, तब भी समाज ने उनका साथ छोड़ दिया था। उस वक्त भी सरपंच ने ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था की थी। अब तक काजल को सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिला है, और वह अपनी दयनीय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रही है।