जयपुर

मामले में आरोपी सुभाष पूनिया, उसके बेटे परमजीत और प्रदीप शर्मा को एसओजी ने सबसे पहले गिरफ्तार किया।
फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट जारी कर सरकारी नौकरी लगाने वाली गैंग ने जयपुर में एसओजी की पूछताछ में नए खुलासे किए हैं। गिरोह के सदस्य फर्जी स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट जारी कर 100 से ज्यादा लोगों की सरकारी नौकरी लगवा चुके हैं। जो यू ट्यूब चैनल के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। फिर मिलने बुलाकर नौकरी लगाने का झांसा देकर सौदा करते थे। जांच में सामने आया है कि ये गैंग पिछले 10 साल से एक्टिव है। अभी गैंग के कुछ मैंबर ही पकड़ में आए हैं। पूरी चेन को पकड़ने में लंबा समय लग सकता है। इसके लिए जयपुर के एसओजी मुख्यालय में सभी से पूछताछ की जा रही है।
जयपुर में DIG परिस देशमुख ने बताया- इस गैंग के सदस्य फर्जी डिग्री, स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट, फर्जी मेडल और बैक डेट में एडमिशन दिलाने का काम किया जाता है। मामले में आरोपी सुभाष पूनिया (52) पुत्र गुरुदयाल निवासी बेरासर घुमाना थाना राजगढ़ (चूरू), उसके बेटे परमजीत हाल पीटीआई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुर्जा पंचायत समिति बसेड़ी (धौलपुर), प्रदीप शर्मा निवासी सरदार शहर चूरू को गिरफ्तार किया गया है। इनसे पूछताछ के बाद पूर्व एसडीसी मनदीप सांगवान पुत्र सत्यवीर सिंह हाल बीकानेर ऑफिस में यूडीसी, पूर्व एलडीसी जगदीश पुत्र मदनगोपाल हाल उच्च माध्यमिक विद्यालय देशनोक (बीकानेर) में यूडीसी और फर्जी डिग्री प्रिंट करने वाले राकेश कुमार को सरदारशहर (चूरू) को भी गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए सभी 6 आरोपी 16 अप्रैल तक रिमांड पर हैं। गिरोह में शामिल 11 सदस्यों को SOG टीम ने चिह्नित किया है, जिनको पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
पिछले 10 साल से चल रहा गिरोह
परिस देशमुख ने बताया- SOG पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी सुभाष पूनिया पहले चूरू जिले के राजगढ़ में स्थित ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू में कार्यरत था। इसके चलते यूनिवसिर्टी में उसकी अच्छी जान-पहचान थी। जॉब पर रहने के दौरान कुछ लोगों को उसने फर्जी डिग्री बनवाकर दी। करीब 10 साल पहले जॉब छोड़ने के बाद वह पूरी तरह फर्जी डिग्री बनवाकर देने की दलाली में जुट गया। ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू में अच्छी जान-पहचान का फायदा उठाकर फर्जी डिग्री बनवाकर देने लगा।

एसओजी ने सुभाष के घर से 7 यूनिवर्सिटी की करीब 50 डिग्रियां बरामद की थीं।
7 यूनिवसिर्टी से कर लिया कॉन्टैक्ट
उन्होंने बताया- फर्जी डिग्री बनवाकर गवर्नमेंट जॉब लगाने पर क्षेत्र में उसका दबदबा बनने लगा। धीरे-धीरे उसने फर्जी डिग्री के लिए कई यूनिवसिर्टी से कॉन्टैक्ट किया। जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्री के लिए उसका 7 यूनिवसिर्टी से कॉन्टैक्ट हो गया था। ज्यादातर फर्जी डिग्री वह ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू से ही बनवाता था।
स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट और मेडल भी दिलवाए
परिस देशमुख ने बताया- धीरे-धीरे काम बढ़ने पर फर्जी डिग्री गैंग में कई लोग शामिल हो गए। काम बढ़ने पर फर्जी डिग्री के साथ ही स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट, मेडल और बैक डेट में एडमिशन तक कराकर लाखों रुपए लेने लगे। लोग गिरोह के सदस्यों को जिस भी कोर्स की कहते। वह उसकी फर्जी डिग्री उपलब्ध करवा देते। सरकारी नौकरी के लिए खेल कोटे को देखते ही स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट और मेडल भी पैसे लेकर दिलवाए जाते थे।

एसओजी को सर्च के दौरान आरोपी के घर से 2 यूनिवर्सिटी की सील भी मिली थी।
यूट्यूब चैनल से पकड़ते कस्टमर
एसडीसी मनदीप सांगवान और पूर्व एलडीसी जगदीश ने कस्टमर को फांसने के लिए यूट्यूब पर चैनल बना लिए थे। चैनल के जरिए वह विभिन्न कॉम्पिटिशन एग्जाम को लेकर अपने वीडियो जारी करते थे। वीडियो में कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी से लेकर जॉब लगने में आने वाली परेशानियों को बताते। परेशानी दूर करने के लिए दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉन्टैक्ट करने की सलाह दी जाती थी।
मिलने बुलाकर करते सौदा
परिस देशमुख ने बताया- यूट्यूब चैनलों पर वीडियो देखकर अभ्यर्थी अपनी-अपनी समस्या को लेकर कॉल करते। गवर्नमेंट जॉब लगाने का वादा कर गिरोह के सदस्य उन्हें मिलने बुलाते। मिलने पहुंचने पर उसके डॉक्यूमेंट को देखकर समस्या दूर करने के लिए कहते थे। जल्द निकलने वाली भर्ती में आवेदन करने के लिए भी कहा जाता था। आवेदन के लिए फर्जी डिग्री, स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट आदि सभी व्यवस्था करने के बदले में रेट कार्ड बताते थे।

मामले में गुरुवार को दो पूर्व एलडीसी और फर्जी डिग्री पिंट करने वाले को गिरफ्तार किया गया।
सब की अलग-अलग फीस
गिरोह की तरफ से फर्जी डिग्री दिलवाने के एवज में 1.50 से 2 लाख रुपए, स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट (नेशनल और स्टेट लेवल) के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपए, मेडल दिलवाने के एवज में 20 से 50 हजार रुपए, बैक डेट में एडमिशन के लिए यूनिवसिर्टी फीस के साथ अपना कमिशन ऐड कर बताया जाता। फर्जी डिग्री से लेकर जॉब तक कुछ नहीं करने वाले अभ्यार्थी से भर्ती पैकेज के हिसाब से लाखों रुपए की मोटी रकम वसूली जाती थी।
प्रोफेशनल खिलाड़ियों को खिलवाकर मेडल दिलवाते
गैंग के मेंबर लाभांश पाने वाले खिलाड़ियों के एडमिशन के साथ साथ प्रोफेशनल खिलाड़ियों का भी दाखिला करवाते थे। खेल प्रतियोगिता जैसे रस्साकसी, वुड बॉल, टारगेट बॉल इत्यादि खेलों में प्रोफेशनल खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय की ओर से खिलाते थे। लाभांश पाने वाले अभ्यर्थियों को रिजर्व में रखते। कई बार लाभांश पाने वाले अभ्यर्थियों की जगह प्रोफेशनल खिलाड़ी को डमी के रूप में भी खिलाकर मेडल दिलवाते। मेडल के अंक का फायदा अभ्यर्थी को मिलते। इस पूरे षड्यंत्र में विश्वविद्यालय एडमिशन और एंट्री भेजने के नाम पर पैसे लेते थे। जो डिग्री की व्यवस्था सुभाष विश्वविद्यालय से नहीं कर पाता तो राकेश उसकी प्रिंटिंग प्रेस में छपवा देता था।
100 से अधिक लोगों को लगवाई गवर्नमेंट जॉब
परिस देशमुख ने बताया- पूछताछ में सामने आया है कि राजस्थान में पिछले 10 साल से गैंग सक्रिय है। फर्जी डिग्री गिरोह में बड़ी संख्या में सदस्य जुड़े हुए हैं। कई यूनिवसिर्टी में काम करने वाले लोगों के साथ ही सरकारी नौकरी में लगे लोग भी गिरोह से जुड़े हैं। करोड़ों रुपए वसूलकर गिरोह अभी तक 100 से अधिक लोगों को फर्जी डिग्री, मेडल और सर्टिफिकेट दिलाकर गवर्नमेंट जॉब लगवा चुका है। गिरोह में सुभाष के अलावा कई बड़े मास्टर माइंड है।





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