Press "Enter" to skip to content

आज अवध में राम: 6 दिसंबर को हुई घटना के साक्षी बने थे धैर्यवर्धन शर्मा, तब 15 साल के थे ये कारसेवक / Shivpuri News

शिवपुरी: 6 दिसंबर 1992 की घटना के साक्षी बने शिवपुरी के कारसेवक धैर्यवर्धन शर्मा आज बेहद ही खुश है। 6 दिसंबर को उस वक्त क्या हुआ वह मंजर शिवपुरी के एक उस वक्त 15 साल के कारसेवक धैर्यवर्धन ने अपने शब्दों में बयां किया है।

धैर्यवर्धन ने बताया कि 1990 की एक घटना जो झांसी में घटित हुई थी दरअसल देश भर से शिला पूजन के लिए कार सेवकों को अयोध्या जाना था झांसी में पड़ाव था लेकिन कार सेवकों पर हमला बोल दिया गया और इस दौरान कई कार सेवकों को को ना केवल गोली लगी बल्कि कई कार सेवक घायल हो गए उस वक्त पलंग के नीचे छुपकर अपनी जान बचानी पड़ी थी। उस दौरान उनके साथ भाजपा के बड़े नेता जयभान सिंह पवैया भी मौजूद रहे।

धैर्यवर्धन ने बताया कि घर वालों को जब घटना के बारे में मालूम हुआ उन्हें चिंता में पूरी रात नींद नहीं आई लेकिन सुबह वह घर लौट आये तब परिजनों को सुकून आया था। उन्होंने बताया कि फिर एक बार मौका आया और अब मौका था 6 दिसंबर का। उन्होंने परिवार से इजाजत मांगी थी लेकिन नानुकुर के बाद उन्हें इजाजत मिल गई थी। वह झांसी में अपनी मौत को सामने देखकर लौटे थे एक बार फिर कार सेवा करने अयोध्या पहुंच गए थे।

6 दिसंबर को ढहाया था ढांचा, बनाया था मिट्टी का चबूतरा

धैर्यवर्धन ने बताया कि वह शिवपुरी से अयोध्या पहुंचे थे जहां उन्हें एक-एक कर भीड़ अपना काम ऐसे करती हुई दिखाई दी कि मानो किसी ने कोई निर्देश दिया हो लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। भीड़ का कोई दिमाग नहीं होता और जो कुछ भी हुआ वह चंद मिनट में ही सामने आ गया और एक इमारत जो सामने थी वह जमींदौज हो गई इतना ही नहीं वहां मौजूद लाखों कार सेवकों की भीड़ ने मिट्टी से एक राम चबूतरा बनाया और यह सब उनके हाथों से उसकी भागीदारी से होता रहा मुख पर जय श्री राम के नारा दिल में राम भक्ति का जज्बा और नौजवान में दौड़ता हुआ नया खून प्रत्यक्षदर्शी रहे।

धैर्यवर्धन शर्मा ने बताया कि वहां किसी भी तरह से अब किसी इमारत का कोई नॉमोनिशान बाकी नहीं था बन रहा था तो एक राम चबूतरा जिसमें राम भगवान की प्रतिमूर्ति की स्थापना कर दी गई थी और चारों तरफ से एक ही आवाज आ रही थी। जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम राम भक्ति में सराबोर धैर्यवर्धन शर्मा अकेले वह नौजवान नहीं थे, बल्कि देशभर से इसी तरह के नौजवानों ने अपनी-अपने तरीके से उस विवादित ढांचे को वहां से हटा दिया था। बल्कि वहां राम चबूतरा बनाने में भी अपना योगदान दिया और फिर जय श्री राम करते हुए एक दूसरे को गले लगाते हुए लौट रहे थे।

दूसरा गोधरा कांड होने से बचा था

धैर्यवर्धन शर्मा को शिवपुरी आना था एक ट्रेन पकड़ी जो झांसी तक आती लेकिन एक गांव कानपुर के पास पड़ा और उस गांव के कुछ लोगों ने साजिश के तहत इस ट्रेन की चेन पुलिंग की इसके बाद उस ट्रेन को गोलियों से निशाना बना लिया ट्रेन में ज्यादातर कार सेवक मौजूद थे और पूरी तरह से जब उन्होंने देखा कि अब हमला हो गया है तब सभी अपनी जान की परवाह किए बगैर एक बार फिर जमीन पर कूदे और गांव का गांव का खदेड़ दिया था।

यह सारी घटना इस नौजवान जिसका नाम आज धैर्यवर्धन शर्मा के रूप में बीजेपी जोड़कर देखा जाता है उसकी आंखों के सामने घटित हुई बल्कि उसके साथ घटित हुई एक नौजवान जिसने तीन-तीन घटनाओं को करीब से देखा जिसमें दो घटनाओं में उसकी मौत उसके सामने इंतजार करती हुई दिखाई दी लेकिन उसका जोश और जुनून इतना ज्यादा था कि दो बार मौत को मात देकर आज राम भक्ति में जय श्री राम के नारे न केवल मंच पर लगाता हुआ दिखाई देता है बल्कि सड़कों पर भी उसकी यह आवाज सुनी जा सकती है।

बता दें कि 6 दिसंबर की घटना का साक्षी बने 15 साल के धैर्यवर्धन चाहे आज 50 साल का हो गया है लेकिन अपने जीवन में इस राम मंदिर को बनते हुए देखा वह आंखों में आंसू भरते हुए कहता है कि राम हम सब की आत्मा है और यही कारण है कि उसे समय 15 साल का नौजवान रहा यह 50 साल का युवा 22 जनवरी को राम के नाम के दीए जलाने के लिए आतुर दिखाई देता है।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »
More from ShivpuriMore posts in Shivpuri »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!