जयपुर

रामायण और रामचरित्र मानस से संदर्भ लेकर जयपुर के वरिष्ठ वैदिक चित्रकार रामु रामदेव पिछले दो साल से चित्र बना रहे हैं। रामु रामदेव भगवान की 109 पेंटिंग्स बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें 200 साल पहले लुप्त हो चुकी गौगुली का प्रयोग किया है। जिसे पूरे विश्व में इंडियन यलों के नाम से जानते हैं। इस कलर को यूवी लाइट में देखने पर यह सोने जैसा चमकता है। इसके साथ हीरे, मोती, माणक और पन्ने का भी प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही गंगाजल और शुद्ध खनिजों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ वैदिक चित्रकार रामु रामदेव ने बताया- भगवान राम की प्रेरणा से अभी तक राम सीता विवाह, सीताजी का माता जी के मंदिर में दर्शन करना, राम लक्ष्मण की ओर से गुरु वशिष्ठ के आश्रम में ताड़का वध, दंडक वन में भगवान श्रीराम की ओर से असुरों का वध के कई चित्र बना चुके हैं।
इसके साथ केवट प्रसंग, भगवान का ध्यान करना, भगवान का प्रणय करते हुए, भगवान श्रीराम का रामेश्वरम की स्थापना कर पूजन करते हुए, श्रीराम के निर्देशन में रामसेतु का निर्माण, श्रीराम के बाल स्वरूप को दर्शाते हुए तीनों माता दशरथ और तीनों भाइयों को चित्रण जैसे कई चित्र बनाए हैं।

रामु रामदेव श्रीराम भगवान की 109 पेंटिंग्स बनाने का प्रयास कर रहे है।
इनमें से अधिकांश कंपलीट हो गए है और कुछ कंप्लीट होने के आसपास है। इन चित्रकृतियों की खास बात यह है कि इसमें शुद्ध गंगाजल और शुद्ध खनिज रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। जब तक पेंटिंग बनती है, तब तक भगवान श्रीराम से संबंधित भजन चलाए जाते हैं।

इनमें से अधिकांश कंपलीट हो गए है और कुछ कंप्लीट होने के आसपास है।
हस्तनिर्मित कागज पर बना रहे चित्र
रामु रामदेव ने बताया- इन चित्रों के लिए हाथों से बनाए कागज का प्रयोग किया हुआ है। खास बात यह है कि 200 साल पहले लुप्त हो चुकी गौगुली का प्रयोग किया है। जिसे पूरे विश्व में इंडियन यलों के नाम से जानते हैं। इस कलर को यूवी लाइट में देखने पर यह सोने जैसा चमकता है। इसके साथ हीरे, मोती, माणक और पन्ने का भी प्रयोग किया जा रहा है। रामदेव ने बताया कि यह कार्य में आने वाले 5 वर्षों तक चलेगा, जिसमें 109 पेंटिंग कंप्लीट करने का उद्देश्य है। जिसे वे अपने माता-पिता को समर्पित करेंगे। वे रोज सुबह 4 बजे उठकर ध्यान कर भारतीय शास्त्रीय संगीत में समय अनुसार राग रागिनी को सुनते हुए एक पवित्र माहौल में चित्र बनाते हैं।

पूर्व राजपरिवार सदस्य सवाई पदमनाभ सिंह ने भी रामु रामदेव की कृतियों की सराहना की है।

उन्होंने श्रीराम के बाल रूप को भी चित्रित किया है।

रामायण और रामचरित्रमानस से प्रेरित चित्रों को उन्होंने तैयार किया है।





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