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सोलह साल से भगवान राम अपनी प्राण प्रतिष्ठा का इंतजार, शासन की डील पोल के चक्कर में दुकान में बंद रामदरवार / Shivpuri News

27 लाख रु कलेक्टर कोष में जमा पर फिर भी नही हो पा रहा मंदिरों का उद्धार
शिवपुरी: अमोला अयोध्या में राम भगवान की प्राण प्रतस्था इस तरह हो रही है कि पूरे भारत में इसकी चर्चा जोरों पर है हर जगह भगवान राम बीराजवान पर लोगो की अलग अलग राय सुनी जा रही है इसके इतर बिस्थपित ग्राम अमोला के राज मंदिर में विराजमान भगवान राम ग्राम पंचायत की हाट बाजार में बनी दुकान में बंद बैठे हैं और ग्राम की जनता और शासन की अनुमति की ओर निहार रहे हैं।

पानी भरता देख ग्राम के लोगो ने पंचायत की दुकान में बेठारे
विस्थापित हुए राम दरबार जिसे ग्राम के लोग राज मंदिर के नाम से जानते थे अमोला ग्राम के बीच में बने मंदिर में विराजमान थे दो साल से डैम में भरता पानी से मंदिर गिरने लगा तो लोगो ने रीति रिवाज से भगवान की मूर्तियों ग्राम पंचायत की हाट बाजार में बनी दुकान में रख दी थी तभी से वो उन्ही दुकानों में रखी है
कलेक्टर कोष में जाम है करीब 27 लाख रु
विस्थापित ग्राम में मंदिर और मंदिर के अधीन लगी जमीन का मुआवजा भी जल संसाधन विभाग ने क्लेक्टेट में जमा कर रखा है इस संदर्भ कई बार विस्थापित लोगो द्वारा आवेदन भी किया गया कि हमें अपने मंदिरों का पैसा मिले जिस से वह अपने भगवानों को रीति रिबाज से विराजमान करें.

पुजारियों से किया गया वादा भी अधूरा
बिस्थापन के समय मंदिरों मंदिरों की जमीन भी हुआ करती थी जिस जमीन से मंदिरों के पुजारी अपना घर के परिजनों का जीवन यापन किया करते थे ज़मीन का मुआवजा तो जमा हो गया था और शासन ने पुजारी को हर माह पैसा देने की आश्वाशन दिया था जो आज दिनांक तक सिर्फ वादा ही रहा
अकेले राम मंदिर का मुआवजा 5 लाख रु
अमोल ग्राम का राजमंदिर का मुआवजा ही 5 लाख 37 हजार 5 सौ 74 रू है अगर यह राशि मिल गई हो ती तो अभी तक भगवान अपने मंदिर में विराजमान होते
क्या बोले लोग
हमारे मंदिरों का बहुत आ पैसा कलेक्टर के कोष में जमा है बार बार आवेदन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है अच्छा होता कि पैसा मिल जाता तो अयोध्या के साथ हम भी भगवान को बैठाते
शिशुपाल सिंह चौहान अमोला ग्रामीण
में 2003 में सरपंच था और मेरे समय ही विस्थापन का अनुबंध हुआ था जब बताया गया था कि पैसा कलेक्टर कोष में जमा होगा और कमेटी बना कर पैसा निकलेगा
देवीलाल आर्य पूर्व सरपंच अमोला 2003
पैसा तो जमा है कलेक्टर कोष में कितना है ये मुझे याद नहीं हैं क्योंकि बहुत दिन हो गए है पैसा मंदिरों का है मिलना चाहिए
दीपक गुर्जर पूर्व सरपंच अमोला 2006

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