मवाना

मेरठ के मवाना में एसडीएम कार्यालय के बाहर जलते किसान को बचाने की कोशिश करते लोग।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के मवाना में एक किसान ने एसडीएम ऑफिस के कैंपस में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। हादसे के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग कंबल और पानी लेकर आग बुझाने के लिए दौड़े। एसडीएम भी केबिन से निकल कर आग बुझाने में जुट गए। हालांकि इस दौरान 15-20 मिनट तक किसान जगवीर जलता रहा। लोगों ने जब तक आग बुझाई तब तक किसान बुरी तरह से झुलस चुका था।
हादसे के बाद लोग उसे लेकर तुंरत मवाना सीएचसी गए। वहां से उसे मेरठ के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल रेफर किया गया। वह करीब 70 प्रतिशत तक जल गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। किसान अलीपुर थाना क्षेत्र के मवाना गांव का रहने वाला है।
किसान का आरोप है कि उसकी फसल खड़ी जमीन को वन विभाग ने अपनी बताकर जोत दिया है। जिससे उसको काफी नुकसान हुआ है। इसी से दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। मौके पर यूपी सरकार के राज्यमंत्री और स्थानीय विधायक दिनेश खटीक भी पहुंचे हैं।
सबसे पहले देखिए घटना की 2 तस्वीरें…

शुक्रवार को मेरठ के मवाना में एक किसान ने एसडीएम कार्यालय में खुद का आग लगाकर सुसाइड की कोशिश की।

हादसे के बाद लोग आनन-फानन में उसे लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज गए, जहां उसका इलाज चल रहा है।
SDM से शिकायत करने के बाद लगाई आग
जगवीर शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय में अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था। उसने दफ्तर में अंदर जाकर एसडीएम को अपनी शिकायत दी। जिसमें लिखा कि उसकी जमीन को वन विभाग ने अपनी बताकर गलत तरीके से जोत दिया है। वन विभाग उसकी जमीन छीनना चाहता है। शिकायत देकर जगवीर जैसे ही एसडीएम के दफ्तर से बाहर निकला उसने खुद पर पेट्रोल डाला और आग लगा ली।

मवाना में किसान के आग लगाने के बाद हॉल में पड़ा जला हुआ कपड़ा।
जलते हुए किसान को देखकर वहां खड़े लोग फौरन उसकी तरफ दौड़े। किसान पर कंबल डाला और पानी डालकर आग बुझाई। फौरन मवाना एसडीएम भी दफ्तर से बाहर निकले। घायल किसान को तुरंत सीएचसी में इलाज के लिए भेजा गया। उसके परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद मौके पर राज्यमंत्री दिनेश खटीक भी पहुंच गए।
“दोषी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई होगी”

राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने कहा, जो भी दोषी अधिकारी होगा उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने कहा, अलीपुर मोरना के कुछ लोग आज सुबह ही मेरे पास आए थे। उन्होंने बताया कि वन विभाग, डीएफओ और कुछ लोग वहां जाकर किसानों की जमीन को वन विभाग की बताकर जोत रहे हैं।
जब मुझे जानकारी मिली तो मैंने डीएफओ से कहा कि वन विभाग की जगह है तो उसको चिह्नित कराएं। इसके बाद नियमानुसार किसान को नोटिस भेजें, जब किसान फसल काट ले तब उस पर कब्जा कर लें। अभी इस आग वाली घटना की जानकारी मिली है। इस मामले में जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

किसान को हॉस्पिटल में देखने पहुंचे राज्यमंत्री, डीएम, एसडीएम व अन्य।
80 साल पुरानी जमीन कब्जा रहा वन विभाग
किसान ने एसडीएम को बताया कि 80 सालों से यह जमीन उसकी है। लेकिन आज वन विभाग उसकी जमीन को सरकारी बताकर कब्जाना चाहता है। खेत में गेंहू की फसल खड़ी थी। वन विभाग ने पूरी फसल जोत दी। लगभग 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। किसान ने कहा कि उसने विभाग को खतौनी भी दिखाई लेकिन वन विभाग अपनी पर अड़ी रहा।
उसे फल का मुआवजा दिलाया जाए। उसकी जमीन को छुड़ाया जाए। यह जमीन उसके परिवार के गुजारे का एकमात्र सहारा है, जिससे वो अपना परिवार पालता है। अगर वन विभाग ने जमीन वापस नहीं दी तो उसके पास परिवार सहित आत्महत्या करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
किसान का शिकायती पत्र

किसान की ओर से कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र दिया गया था।






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