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कहीं निजी बोर से पानी लाने की परेशानी तो कहीं 2 किमी दूर से पानी का संघर्ष / Shivpuri News

शिवपुरी: विश्व जल दिवस पर विशेष रूप से पढ़िए उन गांव की कहानी जहां ग्रामीणों को पानी लाने के लिए कहीं जातिगत संघर्ष से निजी बोर से पानी लाने पर झगड़ा होता था तो कहीं 2 से 5 किलोमीटर दूर से पानी लाने का संघर्ष था। लेकिन 2023 की शुरुआत में नल- जल योजना गांव में पहुंच जाने से अब ग्रामीणों को राहत है।


ग्राम ककरवाया और तानपुर में पानी का स्रोत सिर्फ निजी बोर थे। यहां जब इक्का-दुक्का हैंडपंप खराब हो जाते थे तो लोगों को निजी बोर पर पानी लेने जाना पड़ता था, लेकिन परेशानी यह थी कि जातिगत आंकड़ों में यहां के लोग दूर से पानी भरते थे। जिसकी वजह से कई बार लोगों को परेशानी का सामना तब करना पड़ता था जब हैंडपंप भी खराब हो जाते थे।ऐसे में गांव में नल-जल योजना लागू हो जाने से अब बड़ी राहत लोगों को मिली है।

हातोद आदिवासी बस्ती में सिर्फ हैंडपंप पानी का सहारा, खराब होने पर 2 किलोमीटर दूर जाते थे
हातोद की आदिवासी बस्ती में सिर्फ हैंडपंप से पानी मिलता था और उसके खराब हो जाने पर ग्रामीण परेशान होते थे। अब उन्हें 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था। ऐसे में गांव में नल-जल कनेक्शन हो जाने से अब ग्राम वासियों को राहत मिल गई है।

नल-जल से बदल गए हैं गांव के हालात
हम यदि आसपास के गांव की बात करें तो हातौद में 2 किलोमीटर दूर से आदिवासी पानी लाते थे, इसी तरह से तानपुर और ककरवाया में पानी निजी बोर से आता था, जहां जातिगत संघर्ष का मामला था। अब यहां हालात बदल गए हैं और नल-जल योजना लागू होने से पानी घर में मिल रहा है। – एलपी सिंह, ई ई,पीएचई, शिवपुरी

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