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CRPF सूबेदार अशोक चौरसिया का ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से हुआ निधन, आज दी जाएगी अंतिम बिदाई / Shivpuri News

शिवपुरी से 53 किलोमीटर दूर शिवपुरी पिछोर मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत मनपुरा में मातम पसरा हुआ। दरअसल महाराष्ट्र के पुणे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में देश को सेवाएं दे रहे 45 वर्षीय सूबेदार के पद पर पदस्थ अशोक कुमार चौरसिया का निधन हार्ट अटैक से हो गया है।


सूबेदार अशोक चौरसिया के चचेरे भाई ने बताया कि शनिवार सुबह पुणे में सूबेदार अशोक कुमार चौरसिया सीआरपीएफ बटालियन 242 में सैनिकों को प्रशिक्षण देने के लिए ड्यूटी पर जा रहे थे कि रास्ते में सीने में तेज दर्द हुआ, तत्काल कार्यालय को खबर भेजी गई। वहां से सैनिक अस्पताल भर्ती कराया गया फिर किसी बड़े अस्पताल के लिए उन्हें रेफर किया गया लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।

परिजनों को पुणे में अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सूबेदार अशोक चौरसिया के मृतक शरीर को फ्लाइट से मुंबई से ग्वालियर और ग्वालियर से आज 12 बजे तक ग्राम पंचायत मनपुरा लाया जाएगा, जहां गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

मनमौजी और मजाकिया स्वभाव के थे अशोक

सूबेदार अशोक चौरसिया सीआरपीएफ में सैनिक पर भर्ती हुए थे परिवार में पत्नी के अलावा एक छोटा बच्चा हैं। अशोक बड़े ही मनमौजी और मजाकिया स्वभाव के व्यक्ति थे। अशोक चौरसिया तीन भाई हैं। अशोक के माता-पिता का देहांत कई वर्ष पहले हो चुका है। अशोक के बड़े भाई विष्णु चौरसिया का भी निधन 10 साल पहले हो चुका है। छोटा भाई हरिचरण चौरसिया राजस्थान के जयपुर में प्राइवेट नौकरी करता है। अशोक की तीन बहन भी है तीनों की शादी हो चुकी है।


18 साल बाद मिली थी संतान की खुशी

सूबेदार अशोक चौरसिया की सीआरपीएफ की नौकरी को 22 वर्ष हो चुके है। 20 साल पहले अशोक चौरसिया की शादी सीतामढ़ी से हुई थी। लेकिन शादी कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी अशोक को सन्तान सुख नहीं मिल सका था। 18 साल बाद अशोक के घर किलकारी गूंजी थी अशोक को शादी के 18 साल बाद बेटा पैदा हुआ था। आज अशोक का बेटा ढाई साल का है। अशोक अपनी पत्नी सीतामढ़ी और बच्चे के साथ पुणे में ही रह रहे थे।

भांजी का कन्यादान करने के पहले ही आई मौत

सूबेदार अशोक चौरसिया के चचेरे भाई ने बताया कि अशोक की सबसे छोटी बहिन की शादी 6 फरवरी 2023 को होनी है। अशोक ने अपनी बहिन से भांजी का कन्यादान करने की जिद की थी। अशोक के बहनोई और बहिन भी राजी हो गए थे। भांजी की शादी में शामिल होने के लिए अशोक की छुट्टी मंजूर हो चुकी थी। अशोक आज अपने परिवार के साथ पुणे से निकलता ऒर 30 जनवरी को गुना में रहने वाली अपनी बहिन के घर पहुंचता जहां वह अपनी भांजी की शादी की जिम्मेदारियों को उठाता और भांजी का कन्यादान करता लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अशोक के आने एक दिन पहले उसके निधन की खबर आ गई।

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