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संबल योजना में घोटाला कर 10 हज़ार की सैलरी लेने बाला ऑपरेटर बना करोड़ो का मालिक / Shivpuri News

शिवपुरी: शिवपुरी में 10 हजार रूपए की सैलरी बाला कम्यूटर ऑपरेटर करोडो की गाडी मैंटन कर रहा है। इन ऑपरेटर ने शासन की महत्वाकांक्षी योजना संबल में सेंध लगाते हुए जिंदा लोगों को मृत बताकर शासन को करोडो का चूना लगाया है। यह मामला प्रकाश में आने के बाद जिम्मेदार इसे उजागर करने की बजह इस छुपाने के प्रयास में जुटे हुए है।


जानकारी के अनुसार शिवपुरी जिले में मुख्यमंत्री की अति महत्वाकांक्षी संबल योजना में भी घोटालेबाजों ने करोड़ों का गोलमाल कर दिया। जिंदा व्यक्ति को मृत बताकर संबल की सहायता राशि का बंदरबांट किए जाने के लगभग दो दर्जन मामले पुलिस जांच में सामने आए हैं। बताया गया है कि ऐसे ही एक जिंदा व्यक्ति ने अपने नाम से सहायता राशि निकाले जाने की शिकायत बीते दिनों सीएम हेल्पलाइन में की थी, इसके बाद तत्कालीन जनपद सीइओ सृष्टि भदौरिया ने फिजिकल थाने में इस मामले में प्रकरण दर्ज कराया।

पुलिस ने जब एक मामले में एफआइआर दर्ज करके जांच शुरू की तो एक माह की जांच में ऐसे 25 लोगों के नाम सामने आ गए, जिनके जिंदा रहते हुए उन्हें मृत बताकर संबल की करीब एक करोड़ की राशि निकाल ली गई है। उल्लेखनीय है कि संबल योजना में मृतक के परिवार को चार लाख रुपए की सहायता राशि मिलती है।

वर्ष 2018 के मामले की जांच में खुलासा
फिजीकल थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने प्रकरण दर्ज करने के बाद जब मामले की जांच शुरू की तो महज एक माह की जांच में 25 ऐसे नाम सामने आ गए, जिनके जिंदा रहते हुए उन्हें मृत बताकर संबल योजना के तहत सहायता राशि निकाल ली। जिस मामले की शिकायत होने के बाद प्रकरण दर्ज किया गया, वो गोलमाल वर्ष 2018 में किया गया था। बताया गया है कि अभी तक ऐसे लगभग डेढ़ सैकड़ा जिंदा लोगों को मृत बताकर उनके नाम से संबल की सहायता राशि निकाल ली गई, जो लगभग 5 करोड़ रुपए होती है।

ऑपरेटर करोड़पति तो फिर अधिकारी…
मुख्यमंत्री की अति महत्वाकांक्षी संबल योजना को पलीता लगाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर के पास ही जब करोड़ों रुपए के वाहन व प्लॉट हैं, तो फिर इस पूरे घोटाले में जिनके डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग किया गया, उनका बैंक बैलेंस कितना हो गया होगा.. इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

लग्जरी वाहनों का शौकीन ऑपरेटर
करोड़ों के इस घोटाले को अंजाम देने वाले विभागीय अधिकारियों ने जिस ऑपरेटर के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई, उसे शाखा प्रभारी ने कॉन्ट्रेक्ट पर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया था। इसका मासिक वेतन 10 हजार रुपए है। इतने कम वेतन के बावजूद शैलेंद्र के पास लग्जरी वाहनों की भरमार है। जिसमें डेढ़ करोड़ रुपए कीमत की एमजी एस्टर, एमजी हेक्टर प्लस एवं एमजी ग्लॉस्टर के अलावा 30 लाख रुपए कीमत की बोलेरो व स्कार्पियो सहित 3 लाख कीमत की बाइक बजाज डोमिनार है।

सीइओ के डिजीटल हस्ताक्षर, ऑपरेटर बना आरोपी
संबल योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि तभी जारी होती है, जब उस पर जनपद सीइओ के डिजीटल हस्ताक्षर होते हैं। वर्तमान में शिवपुरी जनपद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पोहरी के जनपद सीइओ गगन बाजपेयी ही उस समय शिवपुरी जनपद सीइओ रह चुके थे। यानि उनके समय से ही यह घोटाले होते रहे तथा उनके ही डिजीटल हस्ताक्षर होते रहे हैं। बताते हैं कि गगन बाजपेयी से आरोपी बने ऑपरेटर की बेहद नजदीकियां थीं । तथा एक कैबिनेट मंत्री की सिफारिश पर ही उन्हें फिर से शिवपुरी जनपद सीइओ का अतिरिक्त प्रभार मिला है।

इस मामले की हुई थी शिकायत
तत्कालीन जनपद सीइओ सृष्टि भदौरिया ने 15 दिसंबर 2022 को संबल में फर्जीवाड़े का शिकायती आवेदन फिजिकल थाने में दिया। पुलिस ने संबल योजना शाखा के कंप्यूटर ऑपरेटर शैलेंद्र परमार व उसकी महिला मित्र पलक शर्मा के खिलाफ धारा 420, 120बी के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया। शिकायत में शिवपुरी तहसील के ग्राम इंदरगढ़ निवासी हरिओम शर्मा पुत्र रघुवरदयाल शर्मा को मृत बताकर उनकी पत्नी भारती शर्मा निवासी इंदरगढ़ को 4 लाख 6 हजार रुपए की राशि केनरा बैंक शाखा के खाता क्रमांक 110014778536 आईएफसी कोड क्रमांक 0017905 में भुगतान किया जाना बताया गया है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह खाता भारती शर्मा का ना होकर शिवपुरी निवासी पलक शर्मा का है। पलक ने भारती बनकर भुगतान प्राप्त किया है, तथा उक्त राशि में शैलेंद्र परमार के हिस्से की राशि चेक के माध्यम से भुगतान की गई।

इनका कहना है
हमने तत्कालीन सीइओ सृष्टि की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच में अभी तक दो दर्जन से अधिक लोगों के नाम पर इसी तरह से पैसा निकला जाना पाया गया है। इसमें सीइओ गगन बाजपेयी को हमने नोटिस देकर बुलाया, लेकिन वे तीन दिन से खुद को व्यस्त बता रहे हैं।
कृपाल सिंह राठौड़, फिजीकल थाना प्रभारी, शिवपुरी।

यह मामला मेरे संज्ञान में 25 मई 2022 को आया, तथा मैं 26 मई को यहां से रिलीव हो गया था। अब मुझे शिवपुरी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। मुझे पुलिस भी पूछताछ के लिए बुला रही है। मेरे डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग करके ऑपरेटर ने यह राशि निकाली है।
गगन बाजपेयी, प्रभारी सीईओ जनपद शिवपुरी

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