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जन्मदिवस के दिन सूर्य दत्त सागर महाराज संसार से विदा: 21 साल पहले मुनि क्षमा सागर से कहा था सिद्ध क्षेत्र में लूंगा समाधि

शिवपुरी: अब से 21 साल पहले सन 2001 में जैन मुनि क्षमा सागर महाराज के शिवपुरी चातुर्मास के दौरान जिन्होंने एक दिन जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर सिद्ध क्षेत्र पर समाधि लेने की भावना व्यक्त की थी, उन क्षुल्लक सूर्यदत्त सागर महाराज की समाधि शनिवार अलसुबह सिद्ध क्षेत्र सोनागिर पर हो गई। खास बात यह है कि 24 दिसंबर 1947 को शिवपुरी जिले के पीरोठ में उनका जन्म हुआ और संयोग से उसी तारीख को उन्होंने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर मैं संसार से विरक्ति ली।


महावीर जिनालय के मंत्री चंद्रसेन जैन 89 वर्ष ने बताया कि सन 2001 में जब मुनि क्षमा सागर महाराज और मुनि भव्य सागर महाराज शिवपुरी आए थे, तब दोनों महाराज के प्रवचन के साथ उनकी चर्या में सक्रिय रहते थे। महावीर जिनालय पर आयोजित हुए एक कार्यक्रम के दौरान सन 2001 में उन्होंने कहा- महाराज श्री, मेरी भी भाव दीक्षा लेने के हैं और अंतिम इच्छा यह है कि मेरी समाधि सिद्ध क्षेत्र पर हो। इसके बाद उन्होंने अपनी धर्म साधना बढ़ा दी और कई सारे नियमों को अंगीकार कर वह गृहस्थ व्यवस्था में भी संत की तरह रहने लगे। लंबे अभ्यास और पारिवारिक उत्तरदायित्व को निभाने के बाद सन 2015 में जब वह उपाध्याय निर्भय सागर महाराज के संपर्क में आए तो उन्होंने दीक्षा देने का निवेदन किया।

31 जुलाई 2015 को सागर में क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर पहलवान सिंह पीरोठ वालों का नाम परिवर्तित होकर क्षुल्लक सूर्यदत्त सागर हो गया और वह धर्म साधना में लीन हो गए। 7 साल की कठिन साधना के उपरांत उन्होंने सिद्ध क्षेत्र सोनागिर जी में चातुर्मास किया और यही धर्म साधना करते हुए मुनि आदर्श सागर महाराज से नियमों को अंगीकार कर शुक्रवार को आहार पानी भी त्याग दिया और शनिवार ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:30 बजे णमोकार मंत्र स्मरण करते हुए इस नश्वर देर से विरक्ति ले ली। दोपहर 1:30 बजे पालकी में बैठा कर उनकी सोनागिर में ही यात्रा निकाली गई और यही उनका संस्कार भी हुआ।

धाय महादेव मंदिर महंत शंकरपुरी महाराज को दी अंतिम विदाई
धाय महादेव मंदिर पर लंबे अरसे से महंत शंकर पुरी महाराज का शुक्रवार को गौलोक वास हो गया । वह लंबे अर्से से बीमार थे, जैसे ही यह समाचार जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ शहर वासियों को मिला, वैसे ही शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने शनिवार सुबह धाय महादेव मंदिर पहुंचकर उन्हें नमन कर अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

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