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करैरा के सहकारी बैंक में 3 करोड़ 82 लाख की राशि का हुआ आहरण, धोखाधड़ी का मामला दर्ज / Shivpuri News

शिवपुरी: करैरा के सहकारी बैंक में भी करोड़ों का गबन सामने आया है। यहां बैंक के कर्मचारियों ने षड़यंत्रपूर्वक बैंक को 3.82 रुपये का चूना लगा दिया। शाखा प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने सहायक समिति के प्रबंधक सहित तीन अन्य कर्मचारियों पर मामला दर्ज कर लिया है।

सर्जन सिंह भदौरिया शाखा प्रबंधक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा करैरा के द्वारा करैरा थाने में शिकायती आवेदन दिया गया था। इसके अनुसार प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था टोड़ा पिछोर जिला शिवपुरी के कर्मचारियों द्वारा बैंक के साथ 3,82,79,236 रुपये की धनराशि का आहरण व अंतरण कर धोखाधड़ी की गई है। बैंक द्वारा चार्टेट अकाउंटेट एसके लुल्ला एंड कंपनी द्वारा प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था टोड़ा पिछोर का आडिट कराया गया था। इस पर चार्टेट अकाउंटेट एसके लुल्ला एंड कंपनी द्वारा पैक्स सोसायटी द्वारा दिनांक 13.11.2017 को 23,41,175 रुपये, 11.01.2018 को 49,80,000 रुपये, 04.07.2018 को 70,60,505 रुपये, दिनांक 18.02.2019 को 38,97,556 रुपये और दिनांक 25.04.2019 को दो करोड़ रुपये की धनराशि का संदेहास्पद आहरण पाया गया। इससे कि बैंक को कुल राशि 3,82,79,236 रुपये धनराशि की हानि हुई है। उक्त धोखाधड़ी बैंक के साथ संस्था के सहायक समिति प्रबंधक शिवकुमार शर्मा के साथ मिलकर भृत्य गुरूदेव कुशवाह (आइडी नं. 487), सेवा निवृत्त भृत्य अरूण भार्गव (आइडी नं. 486), सेवा निवृत्त बैंकिंग सहायक सीताराम ठाकुर (आइडी नं. 678) एवं निलंबित शाख प्रबंधक रविंद्र भार्गव (आइडी नं. 477) शाखा करैरा द्वारा उक्त आइडी. का उपयोग करते हुये द्वारा बैंक के साथ बैंक की राशि का षङयंत्र पूर्वक गबन कर भ्रष्टाचार किया है। इनके द्वार अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी की गई हैं। पुलिस ने सहायक समिति प्रबंधक टोड़ा पिछोर शिवकुमार शर्मा एवं सेवा निवृत्त बैकिंग सहायक सीताराम ठाकुर, भृत्य गुरूदेव कुशवाह शाखा नरवर, सेवा निवृत्त भृत्य अरूण भार्गव, निलंबित प्रभारी शाखा प्रबंधक रविन्द्र भार्गव शाखा करैरा के विरूद्व धारा 420, 409, 120बी आइपीसी एवं 12, 13(1)ए, 13(1)बी, 13(1)सी, 13(1)डी, 13(2) भ्रष्टाचार संशोधन निवारण अधिनियम 2018 का पाया जाने से अपराध पंजीबद्ध कर अनुंधान में लिया है।

इस घोटाले में भी भृत्यों की अहम भूमिका

पैक्स संस्था में यह घोटाला भी कोलारस में हुए 80 करोड़ से अधिक के गबन की तर्ज पर किया गया है। कोलारस में भृत्य होने के बाद भी राकेश पाराशर को वित्तीय अधिकार दे दिए गए थे। साथ ही उसने दूसरों के आइडी को इस्तेमाल कर वित्तीय अनियतिता की थी। टोड़ा पिछोर में जो अनियमितता की गई उसमें भी भृत्य शामिल थे। यहां भी कर्मचारियों ने अपनी आइडी का दुरुपयोग किया। प्रदेशस्तर पर चर्चित रहे कोलारस के गबन मामले में कुछ आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन अभी रिकवरी नहीं हो पाई है। इस घोटाले के बाद से अभी भी बैंक में कैश की कमी बनी हुई और लोग अपने ही रुपयों के आहरण के लिए परेशानी का सामना कर रहे हैं।

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