Press "Enter" to skip to content

माधव लेक में जलकुंभी से जलीय जीवों के जीवन को खतरा, ब्रिटिश गवर्नर की पत्नी भारत लाईं थी जलकुंभी / Shivpuri News

शिवपुरी। पर्यटक स्थल भदैयाकुंड व माधव लेक में जलकुंभी से जलीय जीवों को खतरा पैदा हो गया है। इस जलकुंभी को हटाने के लिए न तो फोरेस्ट विभाग जागा है और न ही प्रशासन।

जलकुंभी का पौधा एक जलीय खरपतवार के रूप में माधव लेक क्षेत्र के जलाशयों में जलीय जीव जंतु मरने की कगार पर पहुंच गए हैं। क्योंकि जलकुंभी की अधिकता से जल में रहने वाले जीव जंतुओं को प्रकाश और ऑक्सीजन दोनों ही नहीं मिल पा रहे हैं। जिससे भोजन व ऊर्जा की कमी हो जाने से जलीय जीव जंतुओं का वजूद खतरे में पहुंच चुका है।

ब्रिटिश गवर्नर की पत्नी भारत लाईं थी जलकुंभी
करैरा के जाने-माने पर्यावरणविद् व शिक्षक रविंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 18वीं सदी के प्रथम ब्रिटिश गवर्नर की पत्नी को इस पौधे के फूलों की सुंदरता से बड़ा लगाव था। यही वजह रही कि जब वह भारत आई तो वह अपने साथ जलकुंभी का पौधा लेकर आई जो कि आज हमारे देश के जलीय स्रोतों को नुकसान पहुंचा रहा है।

भोजन व ऊर्जा की कमी से होती है जलीय जीव-जंतुओं की मौत
जलीय पर्यावरण में पाए जाने वाले उत्पादक उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर जलकुंभी बुरा प्रभाव डालती है। खासबात यह है कि जलीय सतह पर इसकी अधिकता हो जाने से जल के अंदर जो पेड़ पौधे पाए जाते हैं, उनको सूर्य की रोशनी और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाती। यही वजह है कि भोजन और ऊर्जा की कमी से वह नष्ट हो जाते हैं जिसका प्रभाव सीधे उत्पादक पौधों पर आश्रित जुप्लैँकटोन, मछलियों व अन्य जीवों पर पड़ने लगता है और भोजन की कमी के कारण वह मरने लगते हैं। इसके असर से पक्षी बड़ी मछलियां और मगरमच्छ भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहते और कुछ ही समय में उस जलीय स्रोत की जैय विविधता नष्ट हो जाती है।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!